इतने हसीन पलों को चाहता हूँ कैद कर लू
समय को न आगे बढ़ने दूँ उसे रोक लू
इनकी ममता इनके दुलार का ऋणी हूँ मै
उबर नहीं सकता इनके कर्ज से कम से कम थोड़ी कोशिश तो कर लूँ मै |
कितनी कठिनायियो और मुश्किलों से हमें पाला है
खुद रहे भूखे हमें दिया निवाला है
खुद रहे भूखे हमें दिया निवाला है
निश्चल भाव से बेटे जैसा प्यार दिया है
बिना किसी उम्मीद के हमें अपना दुलार दिया है
इनकी ममता इनकी करुना का कोई मोल नहीं है
खुशनसीब हैं हम सब की ये अनमोल मिले हैं |
दो दिनों में ही नानी से मिलके दिल बाग-२ हो गया
पुरानी यादों में खोया हुआ आबाद हो गया
वो नाना का बाजार से रोज टाफी लाना
वो नानी के बक्शे से मिठाई चुराना
सुबह से शाम तक धमा चौकड़ी मचाना
और शाम को कहानी सुनने की लालच में नाना का हाथ पैर दबाना
वो चीनी के डिब्बे से चीनी चुरा के खाना
न जाने वो सब दिन कहाँ खो गए
न जाने क्यूँ हम बड़े हो गए
कास हम छोटे ही रहते
नाना और नानी से लिपटे तो रहते
लेकिन अफ़सोस अब वो सब दुबारा न आएगा
अब केवल वो सब विस्म्रित्यों में रह जायेगा
भगवन मेरे नाना- नानी को ऐसे ही बनाये रखना
दे पाऊ थोड़ी खुशियाँ ये आशीर्वाद देते रहना |
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