क्या कहूँ
क्या लिखू
क्या नया बताऊँ
भूलना भी चाहू तो
अटल जैसे प्रिय नेता को
कैसे भूल जाऊं ॥
क्या व्यक्तित्व
क्या शख्सियत
क्या निराला अंदाज
भूलना भी चाहू तो
अटल जैसे नेकदिल इंसान को
कैसे भूल जाऊं ॥
पोखरण
कारगिल
न जाने और कितनी उपलब्धियां
भूलना भी चाहू तो
अटल जैसे कवि हिर्दय को
कैसे भूल जाऊं ॥
पद्म श्री
पद्म विभुसण
भारत रत्न
भूलना भी चाहू तो
अटल जैसे वक्ता को
कैसे भूल जाऊं ॥
चन्दन -२८ मार्च २०१५
क्या लिखू
क्या नया बताऊँ
भूलना भी चाहू तो
अटल जैसे प्रिय नेता को
कैसे भूल जाऊं ॥
क्या व्यक्तित्व
क्या शख्सियत
क्या निराला अंदाज
भूलना भी चाहू तो
अटल जैसे नेकदिल इंसान को
कैसे भूल जाऊं ॥
पोखरण
कारगिल
न जाने और कितनी उपलब्धियां
भूलना भी चाहू तो
अटल जैसे कवि हिर्दय को
कैसे भूल जाऊं ॥
पद्म श्री
पद्म विभुसण
भारत रत्न
भूलना भी चाहू तो
अटल जैसे वक्ता को
कैसे भूल जाऊं ॥
चन्दन -२८ मार्च २०१५