शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

हँसरौली

कितना प्यारा गाँव हमारा 
सुंदर-सुन्दर, न्यारा-न्यारा
मिलजुल के सब रहते थे 
प्यार की बात करते थे
अब जब दूर आ गए 
तब याद वहां की बहुत सताती है
वो गर्मी की सुबह और ठंडी की धुप बहुत याद आती है 

भूले-बिसरे सब याद आते हैं
कभी हँसाते हैं तो कभी रुलाते हैं ॥

वो मास्टर साहब की एक्स्ट्रा क्लास
उनकी वो बाते उनका निराला अंदाज
चूँकि की रोटी
इसलिए की दाल
किन्तु की रोटी बड़ी मजेदार
मास्टर साहब इस दुनिया से चले गए
लेकिन हमारी यादों में अपनी विस्मृतियाँ छोड़ गए
जब तक जीवन है हमारा
वो याद आयेंगे
उनके योगदान को हम भुला न पाएंगे
भूले-बिसरे सब याद आते हैं
कभी हँसाते हैं तो कभी रुलाते हैं ॥

जयमूर्ति सर का 1 सेकंड में ७२ कॉपी जाचना
क्लास में थोड़ी सी भी आवाज पे देवतादीन सर का भड़कना
लालसाहब सर का पढ़ाते-२ खो जाना
वो प्रेम की दुकान
वो तालाब 
वो खेल का मैदान
भूले-बिसरे सब याद आते हैं
कभी हँसाते हैं तो कभी रुलाते हैं ॥


वो सबका मिलके रामलीला देखने जाना
वो राम का विलाप देख के खुद भी आंसू बहाना
वो परशुराम- लक्ष्मण सवांद
वो केवट की जिरह
वो सबरी का प्यार
वो रावण की चीत्कार
वो राम की विजयी हुंकार
भूले बिसरे सब याद आते हैं
कभी हँसाते हैं तो कभी रुलाते हैं ॥ 

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

लाचारी!!

वो दर्द के मायने क्या समझेंगे
जिन्होंने दर्द को जाना ही नहीं है 
गरीबी ,भुखमरी और लाचारी को क्या समझेंगे
जिन्होंने कभी जमीं पे कदम उतारा ही नहीं है  ॥


जिनके लिए जनता केवल वोट है 
जिन्हे सत्ता का लोभ है 
जो लालची और  बेईमान है 
वो  प्यार और लगाव क्या समझेंगे 
जिन्होंने कभी इन सबको जाना ही नहीं है ॥



जिनके लिए मौत बाये हाथ का खेल है 
मारना किसी को चुटकियों का खेल है 
वो उस मरने वाले कि माँ कि विडम्बना को क्या समझेंगे 
जिन्होंने कभी माँ कि ममता को जाना ही नहीं है ॥


जिनको सत्ता का दम्भ है 
जिनके लिए अफजल की फांसी चुनावी स्टंट है
वो उन वीरो कि कुर्बानी को क्या समझेंगे
जिन्होंने कभी  देशभक्ति को जाना ही  नहीं है ॥ 






एक छोटी सी मुलाकात !!

 एक छोटी सी मुलाकात
दो चार प्यारी -प्यारी बात
उनसे मिलाने का सुखद एहसास
उनके चेहरे का विश्वाश
उनकी सादगी
उनकी सच्चाई
सब जैसे यादो में रम गयी है
वो खूबसूरत जैसे आँखों में बस गयी है ॥

वो उनका इतराना
वो उनका शरमाना
न चाहते हुए मेरी तरफ कनखियो से ताकना
ऐसा लगता ही नहीं
हम कल मिले हो
मानो ऐसा हो
जैसे हैम जन्मो के साथी हो
और कुछ अनकही कहने आये हो
मेरे सवालो पे उनके सुलझे जवाब
सब जैसे यादो में रम गयी है
वो खूबसूरत जैसे आँखों में बस गयी है ॥

वो मेरा आगरा जाना
उनसे मिलके आना
जैसे तब से
उदासी भरे जीवन में
एक उत्साह आ गया है
कुछ करने कि आस जगी है
कुछ पाने को जी मचला है
उनके आने से जीवन थोडा-२ बदला है
मेरी अनकही बातो पे उनके जवाब
सब जैसे यादो में रम गयी है
वो खूबसूरत जैसे आँखों में बस गयी है ॥

जीवन !!

हर वक्त एक सा नहीं होता 
हर चोट से जख्म नहीं होता 
रिश्ते प्यार और विस्वास से चलते हैं 
वरना रिस्तो का कोई मतलब नहीं होता ॥

जीने का मतलब साँसे नहीं है 
मरने का अहसास लाशे नहीं है 
जीने वाले तो इज्जत से जीते है 
वरना मर -मर के जीने वालोँ का कोई मंजर नहीं होता ॥ 

तमन्नाओ का आशियाना हो 
उसमे अपनो का आना जाना हो 
फुरसत से बैठ दो पल बतियाना हो 
कुछ सुनना कुछ सुनाना हो 
वरना इट और रोड़ो का घर शामियाना नहीं होता ॥ 

जिंदगी जितनी भी हो 
सुख-चैन की हो 
इज्जत, सुकून हो 
दिखावे कि ना हो 
वरना ज्यादा जीना भी जीना नहीं होता