शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

माँ!!!!!


माँ की ममता की बड़ी अजब कहानी है
जो समझे उसके लिए आंसू और जो समझे उसके लिए पानी है |
सब भूल भी जाऊ लेकिन कैसे भूलू तेरा प्यार
बहुत याद आती है तेरी ममता और तेरा दुलार
जग में माँ से सुंदर नहीं कोई और विचार
वो दुर्गा भी है काली भी है, हैं इसके बहुत प्रकार |
माँ की ममता की बड़ी अजब कहानी है............................

जीवन की हर कठिन राह पर हमको रास्ता दिखलाती है
खुद भूखे पेट भले सो जाये , हमको भर पेट खिलाती है
अगर हम भटक जाये तो सही रास्ता बतलाती है
खुद के सुखो को छोड़ वो कटीले रास्तो पे चलती जाती है |
लेकिन जब माँ बूढी हो जाती है तो हम उसे छोड़ चल देते हैं
खुद के जीवन में रंग भरने को उसके जीवन को बेरंग कर देते हैं
बेटे बदल जाते है पर माँ नहीं बदलती
हो कैसा भी समय वो हौसला नहीं छोड़ती |
माँ की ममता की बड़ी अजब कहानी है ................


माँ की ममता का नहीं कोई सानी है
वो जीवनदायनी,दयालु और स्वाभिमानी है |
जो समझ सका इस प्यार की परिभाषा को
वो क्या समझेगा किसी और की अभिलाषा को |
जो माँ को भूल जाये उससे बड़ा इस दुनिया में नहीं कोई अभागा है
सुख पाता है इस दुनिया में वो, जिसने माँ के लिए अपने सुखो को त्यागा है |
माँ की ममता की अजब कहानी है .........................................

कुछ लोग प्रभु दर्शन को तीर्थ स्थान जाते हैं
बीवी के कहने पे कुछ लोग माँ पे जुल्म ढाते हैं
कितने अभागे हैं वो, जो इस बात को समझ नहीं पाते हैं
की घर में देवी बैठी है और वो उसे ढूढने तीर्थ स्थान क्यूँ जाते हैं |
माँ की ममता की अजब कहानी है.............................

माँ-बेटे का प्यार इस जग में सबसे निराला है
जो भी इसे समझ पाया समझो उसने पिया अमृत का प्याला है |
बस यही दुआ है चन्दन की,की सब बढ़ाते रहे अपनी माँ का मान
जिन्दा बचे कोई पापी, जो करे अपनी माँ का पमान
माँ की ममता की अजब कहानी है.........................................

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

संकल्प !!!

 
चलो आज फिर मिलकर एक नया संकल्प लेते हैं 
नए  इरादों नए विचारों के साथ
की हर आदमी की इज्जत करेंगे
बिना ये देखे की वो गरीब है या अमीर
मालिक है या नौकर
प्रजा है या शासक 
क्यूंकि 
पद पे बैठे लोगों की इज्जत करना तू आपकी मज़बूरी है
नीचे वालों से कैसे मिलते हो इसमें आपकी समझदारी है |

लोग पैसों की वजह से रिश्तों में भी मतभेद करते हैं
जिस बहन के पास पैसा है उसके  साथ भैया दूज भी मनाएंगे
और जिस बहन के पास नहीं है उससे मिलने रक्षाबंधन में भी नहीं जायेंगे 
अपने से छोटों को डरायेंगे 
और जब अपना बॉस आ जाये तो जीभ हिलाते नजर आयेंगे |
ऐसी दोहरी जिंदगी जीते-२ क्या शर्म नहीं आती है 
आखिर कब तक ऐसा चलेगा
कभी न कभी तो तुम्हरा  भी सर झुकेगा
और कभी न कभी तुम्हारा भी जमीर जगेगा 
चलो आज फिर मिलकर एक संकल्प लेते हैं............................................

कभी-२ मै सोचता हूँ की आखिर ऐसा क्यूँ होता है
की लोग इस छोटी सी बात को समझ नहीं पाते है 
की भगवान की इस दुनिया से
सबको एक दिन जाना है
कर लो जितनी भी चोरी
सब यहीं रह जाना है 
फिर क्यूँ हम जीवन भर बैर और इर्ष्या के साथ जीते हैं
जाति,धर्म,सम्प्रदाय और रंग- भेद के नाम पे खून बहाते हैं 
चलो आज फिर मिलकर एक संकल्प लेते हैं........................................


सोचिये जरा अगर ऐसा हो जाये तो क्या होगा 
मनुष्य हर  मनुष्य की इज्जत करेगा 
बिना ये देखे की वो क्या है
अपने और गैरों में फर्क नहीं करेगा 
हर धर्म और जाति को सम्मान देगा 
दीन दुखियारों का कष्ट  हरेगा
हर तरफ ख़ुशी और सदभाव होगा |
चलो आज फिर मिलकर एक संकल्प लेते हैं........................