शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

मेरी भावनाए अपने सबसे प्रिय दोस्त पंकज के लिए !

दोस्त कहूँ या सखा कहूँ ,आखिर तुम ही बोलो तुम्हे क्या कहूँ 
मरुस्थल में हो तुम पानी के जैसे बाढ़ में हो तुम नाव के जैसे
तपती गर्मी में हो छाव के जैसे और ठंडी में सुबह-२ की धुप के जैसे |
जब भी मेरा मन उदास होता है तो तुम प्यारी सी ख़ुशी बन के आते हो
और मेरे मन के सुने अल्बम पे न जाने कितने रंग जमाते हो |
तब मेरे मन में ये विचार आता है की तुम्हे क्या कहूँ
दोस्त कहूँ या सखा कहूँ ,आखिर तुम ही बोलो तुम्हे क्या कहूँ |

तुम हो मेरे उलझन के साथी तुम हो मेरे जीवन के साथी
तुम हो मेरे दुःख के साथी,तुम हो मेरे सुख के साथी |
जब तुम नहीं थे तो जीवन में अँधियारा था
बहुत कुछ होते हुए भी कोई नहीं इतना प्यारा था |
अब जब से तुम आये हो जीवन में एक प्यारी सी ख़ुशी लाये हो 
दिल से दिल का मिलना क्या होता है इसका एहसास कराए हो |
तब मेरे मन में ये विचार आता है की तुम्हे क्या कहूँ 
दोस्त कहूँ या सखा कहूँ ,आखिर तुम ही बोलो तुम्हे क्या कहूँ |

हर शाम को तुमसे फ़ोन पे  दो लफ्जो की बातचीत 
दे जाती है मन को सुकून वो दो लफ्जो की बातचीत |
एक ऐसा सुकून जो औरो से घंटो की बातचीत में नहीं मिलता है 
कभी-२ तो लोगो से मिलके भी नहीं मिलता है 
वो तुमसे एक फ़ोन कॉल पे मिल जाता है  |
तब मेरे मन में ये विचार आता है की तुम्हे क्या कहूँ 
दोस्त कहूँ या सखा कहूँ ,आखिर तुम ही बोलो तुम्हे क्या कहूँ |

वो मानसी-रिया का हस-हस के मिलना 
वो भाभी का हर पल खाने के लिए लड़ना 
दुबे,मयूर ,और तुमाहरे साथ वो तुमाहरे छत पे सोना 
बहुत याद आता है वो तुमाहरे कुत्तो का मेरे पीछे पड़ना |
तब मेरे मन में ये विचार आता है की तुम्हे क्या कहूँ
दोस्त कहूँ या सखा कहूँ ,आखिर तुम ही बोलो तुम्हे क्या कहूँ |
मिलते जुलते रहे हम दोनों इस जीवन में,बस यही दुआ है चन्दन की  
साथ बना रहे हमारा इस जीवन में, बस यही दुआ है चन्दन की |

गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

कलमाड़ी !!!



आखिर सीबीआई ने कलमाड़ी को पकड़ ही लिया 
और ये सब देख के कांग्रेस ने भी पार्टी के हर पद से उन्हें हटा दिया
अब सीबीआई उनको लेके पूछताछ शुरू करेगी 
हर खरीद फ़रोख्त से सम्बंधित सवाल  करेगी
फिर कलमाड़ी का ब्लड प्रेसर ऊपर निचे हो जायेगा
और  इस बीच कुछ और लोगो का नाम भी इसमे आएगा 
शीला,सोनिया और मनमोहन भी शक के दायरे में आयेंगे
थोड़े दिन हर न्यूज़ चैनल पर यही लोग छाएंगे |

फिर सीबीआई कलमाड़ी को लेके शक के घेरे में आएगी
और न चाहते हुए भी जाच में अधिक से अधिक समय लगाएगी
इसी बीच मुख्य विपक्षी पार्टी इस मुद्दे को लेकर बवाल मचाएगी
लेकिन उनके कुछ नेतावों के नाम आ जाने से अपने कदम पीछे हटाएगी  
थोड़े दिन बाद देश की जनता भी सब भूल जाएगी 
और अपना ध्यान नए घोटालो पे लगाएगी
अब जनता बेचारी भी क्या करे
लालू-चारा,फर्नांडिस-कफ़न,अशोक चौहान-आदर्श ,क्या-२ याद रखेगी |

फिर ये केस फास्ट ट्रैक कोर्ट  में जायेगा 
और आने वाले ५ सालों में इसका फैसला आएगा
की सबूतों के अभाव में कलमाड़ी छोड़े जाते हैं 
सोनिया गाँधी,शीला दीक्षित,और मनमोहन क्लीन चिट पाते हैं 
अब इसमें क्या कर सकते है चन्दन 
जब ऐसा ही है अपने देश का कानून
न चाहते हुए भी रोकना पड़ेगा अपना जूनून |





आख़िरकार एक बार फिर सीबीआई ने दिखा दिया की वो सरकार के हाथ की कठपुतली है,सीबीआई ने कलमाड़ी को पूरा समय दिया अपने द्वारा किये गए अपराधो के साक्ष्य हटाने के, हालाँकि वो बीच-२ में दिखावे के लिए छापे मारती रही और कई बार पूछताछ के लिए भी बुलाया.कई बार बहुत दुःख होता है की आखिर ये कैसी सरकार  है?आखिर ये चाहती क्या है? क्या ये सब जानबूझ के हो  रहा  है या  फिर  अनजाने  में? सीबीआई उस आदमी को पकड़ने में इतना समय लगा रही है जिसके बारे में सर्वविदित है की वो एक भ्रष्ट आदमी है और वो कई घोटालों में सहभागी रहा है.
राजा के प्रकरण के बाद सरकार नहीं  चाहती थी की उसकी पार्टी का कोई और आदमी पकड़ा जाये विधानसभा चुनाव के पहले,अब जब चुनाव समाप्ति की ओर हैं तो सीबीआई ने कलमाड़ी को गिरफ्तार कर लिया  ओर ये दिखाने की कोशिश की सीबीआई अभी बिल्कुल  पंगुल नहीं है.....ओर सही मौका देखकर कांग्रेस ने भी कलमाड़ी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.
यहाँ दो प्रकरण की ओर बात करना चाहूँगा ......पहली ये की राजा जो की एक दलित परिवार से हैं आखिर इतनी संपत्ति के मालिक कैसे हुए ,ओर अगर गलत ढंग से हुए तो  उसकी सजा क्या है?क्या सीबीआई में इतना दम है की वो इतने सबूत दिखा पायेगी? ओर अगर दिखा भी लेती है तो क्या उसको इतने लम्बे चलने वाले कोर्ट केस में बचा के रख पायेगी?

दूसरी बात बहन जी से सम्बंधित है वो भी दलित परिवार से हैं ओर आज १ अरब रुपये से ज्यादा की सम्पति की मालकिन है ओर सीबीआई उनकी भी जाँच कर रही  है.अब सवाल ये उठता है की आखिर ये पता लगाने में की उनके पास इतने पैसे कहाँ से आये ५ साल से ज्यादा का समय लग जाता है,अगर तरीका सही है तो क्लीन चिट दे वरना ऐसे लोगो को अन्दर करे .......अगर हमारा कानून इतना पंगु है तो इसे बदलने की जरुरत है,नहीं तो पता नहीं कितने राजा ओर रानी पैदा होते रहेंगे ओर गरीबो का हक़ खाते रहेंगे.

हमारी सरकार अबू सलेम का पर्त्यर्पण करा के अपनी पीठ खुद थपथपाती है की उन्होंने एक कुख्यात आतंकवादी को पकड़ लिया ......अब कोई उनसे पूछे की आखिर इसकी जरूरत क्या थी ,क्योंकि पिछले ३ सालो में सरकार ने कम से कम 20 करोड़े  रुपये से ज्यादा खर्च किये हैं इस आदमी की सुरक्षा ओर सुनवाई में ओर उसका नतीजा ये है की उसके खिलाफ सारे सबूत मिटते जा रहे हैं ओर थोड़े दिनों बाद अबू सलेम आजमगढ़ के किसी विधानसभा सीट से चुनाव लडेगा ओर विधानसभा को गौरवानित करेगा.अब अगर हमारा कानून इतना ही बेकार ओर सडा हुआ है तो अबू सलेम को वहीँ रहने देते यहाँ ला के इतने पैसे खर्चने की क्या जरूरत है.

चलिए भगवान करे की सरकार को सद्बुद्धि दे ओर इन पापियों का नाश करे..........वैसे लिखने को तो बहुत लिखा जा सकता है लेकिन क्या करे अपना ही मन कुंठित होता है इन सब बातो से, कलमाड़ी कांड पे दो लाइन लिखी है की इस केस का नतीजा क्या होगा , आपके सामने पेश कर रहा हूँ पसंद आये तो अपने विचार दीजियेगा ओर अगर गलतियाँ हो तो अपने सुझाव दीजियेगा.................................




चन्दन सिंह




बुधवार, 20 अप्रैल 2011

प्यार,इश्क और मोहब्बत!



प्यार,इश्क और मोहब्बत! आखिर सच क्या है? अक्सर देखा गया है की  १८ साल से लेकर २८ साल की अवस्था तक लोग इन चक्करों  में पड़कर अपनी जिंदगी के कुछ बहुत महत्वपूर्ण समय बर्बाद कर देते हैं,और जब जिंदगी के मध्य दौर में होते हैं या यूँ कहें की जब पूर्ण रूप से जिंदगी को समझते है तब उन्हें लगता है की कितना समय उन्होंने इसके लिए गवा दिया. वैसे आजकल १५ साल से ही शुरू होकर ५० साल तक होने लगा है. क्या ये एक लगाव है,आकर्षण है अपने से विपरीत सेक्स की तरफ या कुछ और, इस तरह के कुछ सवालों ने मुझे झकझोर दिया है या यूँ कहें की मजबूर किया है कुछ लिखने के लिए की आखिर हम अपने आप को  जवानी के शुरूआती दिनों में संभाल क्यूँ नहीं पाते हैं, क्या हमारी संगत गलत लोगों से होती है या परवरिश में हमें इन बातो के बारे में न बताने की वजह होता है या कुछ और ....मैंने ओशो जी की किताब पढ़ी "सम्भोग से समाधी की ओर" और  उस किताब को पढ़ के लगा की सच में कही न कहीं हम जब छोटे होते हैं तो इन सब के बारे में बताया ही नहीं जाता ओर फिर हम जहाँ से भी इन सब के बारे में जो गलत सही पता लगा पाते हैं वो लगाते हैं और जब हमें बाते पता चलती हैं तो फिर हम अपने से विपरीत सेक्स की तरफ आकर्षित होने लगते हैं और फिर  हम बिना सोचे समझे किसी  लड़की  से दिल लगा बैठते हैं और हम उसे प्यार मान बैठते हैं....कई लोगो को शादी-ब्याह में प्यार हो जाता है,कुछ लोगो को स्कूल में हो जाता है और यहाँ तक की कुछ लोगों को अपने ही  गाँव की लड़की से प्यार हो जाता है....और मजे की बात है की उस प्यार से अलग होने के बाद हमें फिर दुबारा प्यार हो जाता है......

मै अगर अपनी बात करूँ तो मैंने पाया है की ये चीजे केवल आदमी को ख़राब करती हैं या यूँ कहें की समय बर्बाद करती हैं,आपने जो लक्ष्य निर्धारित किया है उससे आप कही न कही दूर होने लगते हैं , क्योंकि अक्सर देखा गया है की जब लोग अलग होते हैं एक दूसरे से तो फिर कुछ लोग संभाल नहीं पाते अपने आप को और फिर नशा,दारु,और सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं,और ऐसे लोग  थोड़े कमजोर होते हैं वरना वो आत्महत्या कर ले,हालाँकि बहुत सारे लोग कर भी लेते है आप समाचार पत्रों में हमेशा पढ़ सकते हैं और जो लोग नहीं कर पाते हैं   वो लोग आसान रास्ता अपनाते हैं मरने के लिए और वही लोग सिगरेट, बीडी, गुटका खाना शुरू कर देते हैं.....अपने लक्ष्य की तरफ से भटक जाते हैं और अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण समय का सदुपयोग नहीं कर पाते हैं. और जिन लोगो का प्यार अभी जरी होता है उनमे से ८० % लोग एक दुसरे पे शक कर रहे होते हैं ,केवल १० से २० % लोग इसमे सफल हो पाते हैं.

कितनी बड़ी विडम्बना है हमारे जीवन की हम उसके लिए दुःख मनाते है,रोते हैं,नशा करना शुरू कर देते हैं,कई लोग तो जीवन से ही बिमुख होने की कोशिश करते हैं,  जो २ साल या ५ साल से हमारे जीवन में आया था और चला गया लेकिन उसके बारे में नहीं सोचते जिन्होंने हमें जन्म दिया,जिन्होंने कितना दुःख सहा हमारे लिए,खुद परेशान हुए लेकिन हमारे लिए अपने अस्तर से बेहतर सुविधाएँ प्रदान की हमें...और हमें इस काबिल बनाया की हम प्यार और मोहब्बत कर सकें...आखिर हम अपनी जिम्मेदारियों से कैसे विमुख हो सकते हैं? आज की यवा  पीढ़ी में ७० % लोग ऐसा ही कर रहे हैं माँ बाप को भूलकर या तो अपने प्रियतम के साथ मौज मना रहे हैं या उसके गम में आंसू बहा रहे हैं या फिर किसी नयी प्रियतमा की खोज में समय ख़राब कर रहे हैं.

अब अगर मै ये सब बाते लिख रहा हूँ तो इसका मतलब ये नहीं है की मै ये सारी बाते मान रहा हूँ लेकिन इतना जरूर है की मै अब समझ गया हूँ की आखिर इनका सच क्या है और इसके लिए मै भगवान जी  का आभारी रहूँगा की उन्होंने मेरे कुछ महत्वपूर्ण साल बचा लिए और मुझे इतनी सद्बुद्धि दी की मै सच और झूठ को पहचान सकूँ.
हालाँकि प्यार- मोहब्बत इतना भी ख़राब नहीं है इसी की वजह से  बहुत से लोग बहुत अच्छा कर जाते हैं जैसे उदहारण के तौर पे आप शाहरुख़ खान और गौरी को देख सकते हैं अक्षय और ट्विंकल को देख सकते है या हमारे  समाज में बहुत से ऐसे लोग मिल जायेंगे जो की सफल हैं.  मुझे ये भी पता है की हर सिक्के के दो पहलु होते हैं लेकिन इस सिक्के का एक पहलु बहुत खतरनाक है और वही पहलु कितने लोगो का भविष्य बर्बाद कर रहा है....इस लिए मेरी आप लोगो से गुजारिश है की इसके अस्तर को समझे और जब तक पूर्ण रूप से समझदार न हो जाये या यूँ कहें की कुछ बन न जाये तब तक इस बीमारी से दूर रहें और अगर मजबूर हैं की दूर नहीं रह सकते हैं तो संभल के रहिये....क्योंकि ये भी H1N1 की तरह ही खतरनाक है.....
मुझे पता है की इस  लेख में बहुत सारी गलतियाँ हैं जिनमे सुधार की जरूरत है,और इसके लिए आपके सुझाओं का मै आभारी रहूँगा !भगवान मुझे सद्बुद्धि दे सही मार्ग पे चलने की......

गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

सफलता कि कहानी मेरी जुबानी !!

हर संत कहे साधू कहे सच और साहस है जिसके मन में अंत में जीत उसी की रहे........लगान फ़िल्म के गाने के ये बोल आज कितने सही साबित हुए हैं ,आख़िरकार श्री अन्ना हजारे और उनके साथ आमरण अनशन पर बैठे हुए २५० लोगों की जीत हुई और केंद्र सरकार को झुकना पड़ा.मुझे लगता है अब नेताओं की नीद में खलन पड़ गयी है अब उन्हें भी पाता चल गया है की भारत में एक दूसरे  गाँधी का जनम हो गया है और आज का ये गाँधी इन चोर,भ्रष्ट,बेईमान,दुष्ट और पथ्भ्रस्त नेताओं को बक्सने वाला नहीं है.अच्छा इस आमरण अनशन से आज के युवाओं को एक बात तो समझ में आ गयी होगी की अहिंसा ही सबसे बड़ा हथियार है क्योंकि  किसी अहिंसावादी को मारने में सरकार भी दस बार सोचेगी और अगर आप हिंसा से कोई आन्दोलन चलाते हैं तो उसे कुचलने में सरकार ज्यादा समय नहीं लगाती है इस सब से एक सन्देश तो जाता है की बापू ने जो कदम पहले उठाया था वो आज भी कारगर है और आगे भी रहेगा.


मैंने अपने पुरे जीवन में अभी तक कोई ऐसा आन्दोलन नहीं देखा था,लाखों की संख्या में लोग जंतर मंतर पर नारा लगा रहे थे-अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुमाहरे साथ हैं.......भारत की मजबूरी है लोकपाल जरूरी है.........गली-२ में शोर है सारे नेता चोर हैं.....गाँधी हम शर्मिंदा हैं क्योंकि भ्रस्टाचारी जिन्दा हैं.....इन्ही तरह के कुछ नारों से पूरा आसमान गूँज रहा था,क्या बड़ा क्या छोटा,क्या हिन्दू क्या मुस्लिम,क्या गरीब क्या अमीर सब मिल के भ्रस्टाचार के खिलाफ नारा लगा रहे थे .पहली बार मैंने इतनी बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हुए देखा वो भी बिना किसी पार्टी के,ये सुगबुगाहट है भारत के बदलाव की और लोगों की नाराजगी की आम जनता इन भ्रष्ट नेताओं से कितनी परेशान हो चुकी है,कही न कहीं अब जनता बदलाव चाहती है ,अब जनता को समझ में आ चूका है की ९९% नेता बेईमान हैं,चोर हैं,भ्रष्ट हैं और इन्हें सबक सिखाने की जरूरत है. एक छोटे से उदहारण से इस बात को समझाने की कोशिस करूंगा:कुमारी मायावती जी के पास आज एक अरब से भी ज्यादा की चल-अचल सम्पदा है और ये वो सम्पदा है जो उन्होंने लोगों को बताया है और जो नहीं बताया है वो भगवान जाने अब कोई उनसे पूछे की एक दलित की बेटी जो की एक साधारण स्कूल में आध्यापक थी आखिर पिचले १० सालों में उसके पास कहाँ से इतना पैसा आ गया ,आखिर उनके पास कौन सा ऐसा कारखाना है जो वो इतने अकूत सम्पदा की मालकिन बन बैठी हैं. आज उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा दलितों की हालत ख़राब हैं क्योंकि सारे उच्च जाति के लोग बहूजन समाज पार्टी में आ गए हैं  और दलित बेचारे फिर से दलित हो गए हैं .जो सपना लेके श्री कांशीराम जी ने इस पार्टी की शुरुआत की थी पार्टी सत्ता में आने के बाद अपने उन विचारों ,उन उदेश्यों को भूल चुकी है और यहाँ तक की पार्टी का नारा .....चढ़ गुंडों की छातीपर बटन दबाव हाथी पर  अब बिलकुल बदल गया है क्योंकि अब दलित लोग उनसे पूछ रहे हैं की जब गुंडे चढ़ गए हाथी पर तो बटन कहाँ दबाऊ....कमल पर या साइकल पर या फिर अपनी पुराणी पार्टी निशान पंजे पर....
मै ए सब क्यों कह रहा हूँ क्योंकि मायावती जी ने अपने सिधान्तों और जिस वजह से पार्टी सत्ता में आई उसको भूल चुकी हैं और आने वालों दिनों में जनता उनको जवाब देगी और भगवान करें ऐसा हो.

मै सुबह करीब ११ बज के ३० मिनट पे वहां पहुंचा आँखों के सामने ऐसा नजारा जो आँखे देखने के लियी तरस रही थी,कहीं न कहीं मेरे मन में ये बहुत दिन से चल रहा था या यूँ कहें की हर भारतीय ये चाहता था की लोग ऐसे अनशन में बिना बुलाये अपने मन से शामिल हो.जब मै पहुंचा तो मेधा पाटेकर जी बोल रही थी सब लोग ध्यान से उनको सुन रहे थे,बीच-२ में तालियों की आवाज भी गूँज रही थी उसी दौरान किरण बेदी जी को देखने का सौभाग्य मिला साथ में अरविन्द केजरीवाल,फराह खान,विशाल,ई श्रीधरन,एक बाबा १०३ साल की अवस्था में इस अनशन को अपना समर्थन देने आये थे और वो स्वतन्त्रा सेनानी भी थे,अनुपम खेर,स्वामी अग्निवेश जी और बहुत सारे लोग,लेकिन तहलका तब मचा जब बाबा रामदेव जी पहुंचे ,लोग आपे से बाहर हो गए जोर-२ से नारे लगने लगे बाबा रामदेव की जय -बाबा रामदेव की जय,सारा वातावरण कोलाहल से भर गया और अंत में किरण बेदी जी को आ के सबको शांत कराना पड़ा .उसके थोड़ी देर बाद बाबा बोलने के लिए आये क्या निराला अंदाज,मुस्कुराता  चेहरा,चेहरे पे लालिमा बाबा बिलकुल अद्भुत लग रहे थे और  जनता मंत्रमुग्ध होके बाबा को सुने जा रही थी....बाबा ने पूरी फिजा ही  बदल दी इस आमरण अनशन की जो आमरण अनशनकारी लेते हुए थे वो उठ के बैठ गए और जो सो रहे थे वो जग गए ...क्या अद्भुत दृश्य था वो मै शब्दों में बयां नहीं कर सकता...मेरे शब्द कम पड़ेगे उनके लिए.

कब शाम हो गयी हमें पता ही नहीं चला और उसके बाद लोग हाथों में प्लेट और च्च्मच ले के बजाते हुए इंडिया गाते की तरफ चलने लगे.लाखों लोग हाथों में प्लेट बजाते और नारा लगाते चले जा रहे थे,असीम उत्साह कुछ नया करने का इरादा ,मन में विश्वास और तभी लग रहा था की सरकार अब ज्यादा देर नहीं करने वाली.
हम एक घंटे में इंडिया गेट पहुंचे और फिर वहां से मार्च में शामिल होके फिर वापस  आये जंतर-मंतर. अंत में इतना कहना चाहूँगा की भगवान करें भारत फिर पहले जैसा पाविट्र और शुद्ध हो जाये और साथ के साथ हम लोगों के मन में भी सच्चाई और सद्भावना का वास हो..........आज के लिए इतना ही बाकि फिर कल.

मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

ये केवल अन्ना जी की नहीं पुरे देश की लड़ाई है !


श्री अन्ना हजारे और पुजय्नीय स्वामी अग्निवेश को देखकर ऐसा लगा जैसे गाँधी जी और स्वामी विवेकानंद जी को देख लिया हो,मुझे लगता है जिन लोगो ने गाँधी जी और विवेकानंद जी को नहीं देखा है उन्हें इन दोनों महापुरुषों को जरूर देखना चाहिए और जो लोग पुनर्जन्म में विश्वास रखते हैं वो मेरी बातों का विश्वास करेंगे की दोनों लोग कही कहीं उन दोनों लोगो के ही उत्तराधिकारी हैं. मुझे लगता है की ये मेरा परम सौभाग्य है की मै श्री अन्ना हजारे जी के द्वारा शुरू किये गए आमरण अनशन का हिस्सा बन पाया और वहां जा के एक सुखद अनुभूति हुई की हमारे देश में आज भी महापुरुषों की कमी नहीं है आज भी हमारी धरती उतनी ही परम पावन है जितनी पहले हुआ करती थी,पहले भी राक्षस थे और आज भी राक्षस हैं,आज उनका रूप बदला हुआ है, पहले सबको पता होता था की कौन राक्षस है लेकिन आज पता नहीं चलता की कौन राक्षस है और कौन सन्यासी.....मधु कोड़ा,लालू प्रसाद,राजा,शिबू सोरेन,मायावती इत्यादि ये कुछ उन्ही प्रकार के लोगों के नाम हैं.

अब मै मुद्दे की बात करता हूँ.....१७० लोग(साथ में हजारो लोग बिना आमरण अनसन के उनके sat श्री अन्ना हजारे जी के साथ कल(.०४.२०११) से आमरण अनशन पे बैठे हुए हैं JAN LOKPAL BILL के लिए ये वो बिल है जो हमें एक तरह से पूर्ण आजादी दिला सकता है और भ्रस्टाचार के खिलाफ एक ऐतिहासिक कदम हो सकता है, लेकिन हमारी सरकार इस बिल को मानने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि इस बिल में साफ़- लिखा हुआ है की महीने से साल के भीतर किसी भी तरह की शिकायत का निवारण होगा और जितना हर्जाना होता है सरकार का, वो दोषी से वसूला जायेगा.अब यहाँ मुझे ये नहीं में समझ में आता की इसमें सरकार को क्या परेशानी है अगर उनका दामन साफ है तो इससे अच्छा बिल हो ही नहीं सकता और अगर नहीं है तो फिर तो सोचने वाली बात है की हम ऐसे लोगों को वोट क्यूँ देते हैं. अब कल्पना कीजिये अगर ये बिल पहले होता तो  लालू जी ने जो चारा खाया उसे उन्हें निगलना पड़ता,कोड़ा जी जो १००० करोड़ का गबन कर गए उन्हें भरना पड़ता,और जो राजा ने ,७६,००० करोड़ रुपये मिलकर  बाट लिए वो उन्हें वापस देना पड़ता,लेकिन हमारी सरकार ये नहीं चाहती क्योंकि सरकार ही उन्ही लोगों की वजह से चल रही है.

वहां मेरी मुलाकात हुई श्री सुभास मानव जी से जो की सुल्तानपुर से चल के आये हैं आमरण अनशन के लिए ,बिलकुल युवा ,आँखों में उत्साह.मन में विश्वास .मैंने उनसे पूछा की आप उतनी दूर से चल के आये हैं आखिर वो क्या चीज है जो आपको प्रेरित करती है वहां से यहाँ आने के लिए ...उन्होंने कहा की मुझे ये धरती प्रेरित करती है, तिरंगा प्रेरित करता है ,उन शहीदों का दिया हुआ बलिदान प्रेरित करता है जिनकी वजह से आज हम खुली हवा में सास ले रहे हैं.....अब मेरा सवाल आप लोगों से है की क्या हमें ये सब प्रेरित नहीं करता है,अगर आपका जवाब नहीं है तो कोई बात नहीं लेकिन अगर आपका जवाब हाँ है तो श्री अन्ना हजारे जी के इस आमरण अनशन का सहयोग दीजिये और जो भी अपनी तरफ से कर सकते हैं वो कीजिये क्योंकि इससे बेहतर मौका नहीं आने वाला है..... और अगर आप लोग एक दिन का समय निकल सकते हैं तो जंतर मंतर जाईये ये जरूरी नहीं है की आप पुरे दिन के लिए जाये घंटे के लिए जाईये घंटे के लिए जाईये लेकिन जाईये जरूर.....आज मौका है हमारे पास और अगर आज इस मौके को नहीं भुनाया तो बाद में हमारे पास ड्राइंग रूम में बैठ के सरकार को कोसने के अलावा कुछ नहीं बचेगा और पता नहीं कितने मधु कोड़ा,मायावाती,राजा,और लालू जैसे लोग पैदा होते रहेंगे. अगर आप कहीं दूसरे सहर में हैतो आप इस मोबाइल नंबर पर मिस कॉल करके अपनी उपस्थिथि दर्ज करा सकते हैं -०९७१८५००६०६ या इस वेबसाइट पर क्लिक करके अपनीं उपस्थिथि दर्ज करा सकते हैं-www.indiaagainstcorruption.org. मुझे ये पता है की सब लोग अपने- जॉब और ब्यवसाय में मशगूल हैं लेकिन फिर भी थोडा सा समय निकालिए इस देश के लिए भी अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए भी.