शनिवार, 29 मार्च 2014

तुम

हर जगह तुम ही तुम
दिल, धड़कन सब
बस तुम ही तुम
इस दिल का
चैन भी तुम
करार भी तुम
मेरे मालिक और मेरी सरकार भी तुम ॥

उजाला भी तुम
प्रकाश भी तुम
चंदा कि चकोरी और
सूर्य का तेज भी तुम
दिन भी तुम
रात भी तुम
मेरे हर सवाल का जवाब भी तुम
मेरे मालिक और मेरी सरकार भी तुम॥

इश्क़ भी तुम
रब भी तुम
दुआ और
आरजू भी तुम
सपना भी तुम
हकीकत भी तुम
मेरी दिल धड़कन और जिगर भी तुम
मेरे मालिक और मेरी सरकार भी तुम ॥

आशिक़ी भी तुम
बन्दिगी भी तुम
दोस्त भी तुम
सखा भी तुम
मेरे लिए जीवन जीने कि आस तुम
मेरे मालिक और सरकार भी तुम  

शनिवार, 22 मार्च 2014

हमसफ़र

इस अंजुमन कि गलियों में
हम राहे हमसफ़र ढूंढते है
लेके दिलों में प्यार और जज्बात
हम राहे गुजर ढूंढते हैं ॥

इरादो से नेक
दिल से साफ
वफ़ा की राह पे चलने वाला
सनम ढूंढते हैं
इस अंजुमन कि गलियों में
हम राहे हमसफ़र ढूंढते है ॥

जिसकी आरजू भी मै
जिसका अंजाम भी मै
ऐसा हसीन, खूबसूरत
दिलबर ढूंढते हैं
इस अंजुमन कि गलियों में
हम राहे हमसफ़र ढूंढते है ॥

जिसका प्यार भी मै
जिसका ऐतबार भी मै
ऐसा रहनुमा रूपी
इसान ढूंढते हैं
इस अंजुमन कि गलियों में
हम राहे हमसफ़र ढूंढते है ॥

मंगलवार, 18 मार्च 2014

अनुभव

राहे जिंदगी जब गुजरा 
तो हर इसां अपना सा नजर आया 
मुस्किले जब आयी 
राहे जिंदगी में 
तो हर इंसा बदला-बदला सा नजर आया ॥


भ्रम में जीते थे 
कि ये अपने है
वो पराये हैं 
चलो अच्छा हुआ उन्होंने ये भ्रम भी तोड़ दिया ॥ 


जिन्हे हम फक्र से अपना कहते थे 
जिनके लिए जीते थे मरते थे 
मुश्किल घडी में  
उन्होंने भी किनारा कर लिया
बेटा -बेटा कहके न जाने कब 
अपनों  से पराया कर दिया ॥ 


बेटा -बेटा कहते थे 
साथ उठते थे 
साथ बैठते थे 
पर न जाने किसका असर हुआ 
जब जरुरत थी अपनों के मरहम की 
तभी उन्होंने जख्म दिया ॥ 

रविवार, 16 मार्च 2014

तुम

ख्वाबो में तुम
नींदो में तुम
रातो में तुम
यादो में तुम
हर दिशा
हर जगह
मेरा सब कुछ
बस तुम ही तुम ॥

जीवन में संगीत तुम
दिलो में प्रीत तुम
ह्रदय में सांस तुम
सुबह को तुम
शाम को तुम
धर्म और ईमान तुम
मेरा सब कुछ
बस तुम ही तुम ॥

आशा भी तुम
निराशा भी तुम
अंधकार भी तुम
उजाला भी तुम
इश्क़ भी तुम
प्यार भी तुम
दिल, धड़कन और जज्बात भी तुम
मेरा सब कुछ
बस तुम ही तुम ॥



होली

होली में रंग गुलाल बरसे
तुमपे खुदा कि रहमत बरसे
सुख, शांति में वृद्धि हो
जीवन में समृद्धि हो
रंगो की भाति रंग बिरंगी दुनिया हो
हर तरफ बस खुशियां ही खुशिया हो ॥

लाल रंग सिंदूर बने
पीला माथे का तिलक
हरे रंग कि चूड़ियाँ
नीला बने कवच
सफ़ेद रंग सच्चाई लाये
काला बुरो से बचाये
सब दुःख हर ले जाये
घर में बस खुशियां आये
होली मे रंग गुलाल बरसे
तुमपे खुदा कि रहमत बरसे ॥

जीवन के इस धारा प्रवाह में
रंगो का न कभी अभाव हो
बुराइयां होलिका संग जले
अच्छाइयाँ दिन प्रतिदिन बढे
बस ऐसी ही होली हो
जिसमे ख़ुशी रूप में रंग गुलाल बरसे
तुमपे ख़ुदा कि रहमत बरसे ॥

शुक्रवार, 7 मार्च 2014

पल

अगला पल क्या होगा
मालूम नहीं
हम तुम होंगे
ये जीवन होगा
नभ
सृष्टि   
ये दुनिया 
ये तारे चाँद सितारे होंगे 
मालूम नहीं
देश होंगे 
प्रदेश होंगे 
सीमायें होंगी 
युद्ध होंगे 
मालूम नहीं ॥ 

जब ये सब होगा ही नहीं
तो क्यूँ मन में इतनी अभिलाषा है 
क्यूँ सब कुछ अपना बनाने कि आशा है 
क्यूँ आदमी इतना परेशान है?
क्यूँ आज इंसान इंसान नहीं है ? 
क्यूँ आदमियों में राम नहीं हैं 
नारियों में सीता नहीं है 
क्यूँ हर तरफ कोहराम ही कोहराम है
ये सोचने कि बात है 
अगला पल क्या होगा मालूम नहीं ॥ 






बुधवार, 5 मार्च 2014

मन

मन उदास
व्यथा से भरा हुआ
न कुछ सोच पा  रहा
न कुछ समझ में आ रहा
बस न जाने  किस राह पे अग्रसर
बस यूँ ही
बढ़ा जा रहा
न जाने क्या पाना चाहता है
न जाने क्या ढूँढता है
न जाने क्यूँ ?
भ्रमित
भयभीत
सहमा सा
डरा हुआ आगे बढ़ रहा है
चाहता हूँ
बेख़ौफ़ रहे
किसी से ना डरे
सही राह पे चले
लेकिन न जाने क्यूँ
जो चाहता हूँ
वो नहीं हो रहा है
मन उदास
व्यथा से भरा हुआ
न कुछ सोच पा  रहा
न कुछ समझ में आ रहा ॥

सोमवार, 3 मार्च 2014

खोज

काशी ढूढ़ा
मथुरा ढूढ़ा
ढूढ़ा वृंदावन 
नहीं मिले प्रभु आप 
भटका मै वन -वन  ॥ 

पूरी ढूढ़ा
प्रयाग ढूंढा 
ढूढ़ा कोकिलावन 
नहीं मिले प्रभु आप 
भटका मै पूरा जीवन    ॥ 

घर-घर ढूढ़ा
मगहर ढूढ़ा 
ढूढ़ा पूरा जीवन 
नहीं मिले प्रभु आप 
भटका मै आजीवन  ॥ 

तब जाके मैंने इस राज को जाना 
प्रभु बसते हैं ह्रदय में
गरीबो में
भूखो में
प्यासो में  
क्यूँ काशी 
क्यूँ मथुरा 
और क्यूँ वृन्दावन जाना ॥  


तुम

हर एक दर्द कि दवा हो
तुम इश्क़, प्यार और दुआ हो
जिसे मैंने सपनो में देखा
जिसे मैंने खाव्बो में चाहा
वही खूबसूरत स्वप्न हो तुम ॥

आशाओं कि डोर हो
कल्पना कि उड़ान हो
तुम चंद्रमा कि चादनी
सूर्य कि लालिमा
सुन्दर सुशिल और विद्वान हो
हर एक दर्द कि दवा हो
तुम इश्क़, प्यार और दुआ हो ॥

राजा  के मुकुट का ताज हो
गरीब कि लाज हो
मेरे जीवन कि आस हो
तुम पुष्प सी कोमल
हसीं और लाजवाब हो
हर एक दर्द कि दवा हो
तुम इश्क़, प्यार और दुआ हो ॥


तुम

तुम्हारे चेहरे कि उदासी
मुझे बिलकुल नहीं भाती है
तुम्हारी हंसी मुझे जन्नतों कि सैर कराती है
चाहता हूँ तुम हसती रहो
मुस्कुराती रहो
मुश्किलो में भी खिलखिलाती रहो
ख़ुशी ही ख़ुशी हो
न कोई गम हो
मेरे सनम  पे ना कोई सितम हो
तुम्हारी हर आरजू पूरी हो
न कोई तम्मना अधूरी हो
मै तुम्हारी तम्मनाओ पे खरा उतारू
तुम्हारे लिए ही जियु
तुम्हारे लिए ही मरू
बिना किसी छल कपट के तुम्हे प्यार करू
दुलार करू
अपनी पलकों पे बिठा निहारा करू
हर वो ख़ुशी दूँ जिसकी तुम्हे तम्मना हो
अब हमें संग जीना और संग मरना है
तुम्हारे चेहरे कि उदासी
मुझे बिलकुल नहीं भाती है॥

तुम

तुम्हारे मुख से पतिदेव सुनना
बिलकुल ऐसा लगता है
जैसे हिरन को कस्तूरी मिल गयी हो
लैला को मझनु
हीर को राँझा
रोमिओ को जूलिएट
कृष्णा को राधा
प्यासे को पानी
बूढ़े को जवानी
निर्धन को धन
मरते हुए को जीवन
असफल आदमी को सफलता
दुर्बल को सजगता
हारे  को जीत
कुरूप को प्रीत
भक्त को भगवान 
बेघर को मकान
दिलवाले को दुल्हनिया
प्रेमी को सजनिया
ऐसा है एहसास
तुम्हारे मुख से पतिदेव सुनने का ॥ 

तुम

गर्व है
अभिमान है
तू ही मेरी जिंदगी
तू ही मेरी जान है
तू ही मेरी आशिक़ी
तू ही दिल
तू ही मेरा अरमान है ॥

तू ही तम्मना
तू ही आरजू
तू ही मीत
तू ही प्रीत
तू ही जीत
तू ही हार
तू ही सम्मान
और तू ही मेरा अरमान है ॥

दिन भी तू
रात  भी तू
इश्क़ भी तू
प्यार भी तू
जजज्बात भी तू
सम्मान भी तू
मेरा दिल और मेरी जान भी तू
दौलत भी तू
मजहब  भी तू
काशी  भी तू
मथुरा भी तू
गीता भी तू
कुरान भी तू
दिल भी तू
और जान  भी तू ॥
 


शनिवार, 1 मार्च 2014

तुम

कई रोज से सोचता हूँ
तुमसे  कहूं दिल कि बात
कितने करीब हो शायद तुम्हे नहीं है इसका एहसास
एहसास दिलाना चाहूं
फिर भी नहीं दिला पाता  हूँ
बढे हुए कदमो को वापस बुलाता हूँ
और सोचता हूँ
कि शायद तुम्हे एक दिन खुद एहसास हो जायेगा
कि तुम मेरे कितने करीब हो
 तुम ही रब हो
तुम्ही रकीब हो
तुम्ही जीवन
तुम्ही मेरा नसीब हो
तुम्ही दुआ हो
तुम्ही आरजू हो
तुम्ही सुख हो
तुम्ही चैन हो
तुम्ही दिन हो
तुम्ही रात हो
तुम ही चादनी
तुम ही प्रकाश हो
और उस दिन मै तुमसे कहूंगा
अपने दिल कि बात
जो अभी नहीं  कह पाता हूँ ॥

तुम

हर एक लम्हा तुम्हारे साथ जीने का इरादा है
तुम्हे धुप लगे तो मेरा छाव बनाने का वादा है
तम्मनाओ कि आरजू में
दिल कभी -२ घबराता है
तुम्हे खो ना दूँ
ये सोच जी मेरा अकुलाता है
चाहता हूँ तुम्हे पास रखु अपने सीने से
गम कि परछाई भी न आने दूँ
तुम्हारे गमो को अपना बना लूँ
तुम्ही में खो जाऊं
तुम्ही में रम जाऊं ॥

वो तुम्हारी प्यारी बाते
वो तुमसे सपनो में कि मुलाकाते
वो तुम्हारा रूठना मनाना
वो तुम्हारी हठखेलियां
वो तुम्हारी नादानियाँ
हर रूप तुम्हारा प्यारा है
मेरे जीवन पे अधिकार तुम्हारा है
इच्छा है तुम्हे पाने कि
अपना बनाने कि
हर एक लम्हा तुम्हारे साथ जीने का इरादा है
तुम्हे धुप लगे तो मेरा छाव बनाने का वादा है ॥

आओ एक नया जीवन शुरू करते हैं
मिलजुल के सपनो में रंग भरते हैं
एक नया कारवां बनाते हैं
जीवनभर साथ चलते हैं
हर एक लम्हा तुम्हारे साथ जीने का इरादा है
तुम्हे धुप लगे तो मेरा छाव बनाने का वादा है ॥



सैनिक

वो रोज हमारे वतन  पे गोलाबारी करते हैं
हमारे जवानो के लहू से खेलते हैं
उनकी गुस्ताखियां इस कदर बढ़ चुकी हैं
कि हमारे सैनिको के सर काट ले जाते है
और हमारी बुझदिल सरकार
हाथ पे हाथ धरे बैठी है
सोनिया राहुल कि चापलूसी में लगी है
न जाने कब इन हुक्मरानो को अक्ल आएगी
न जाने कब ये धरती अपने सपूतो के खून से नहीं नहायेगी
न जाने कब अमन और चैन होगा
न जाने कब एक और सरबजीत नहीं मरेगा ॥

दुःख होता है जब कोई शहीद तिरंगे में लिपटा होता है
माँ रोती है
पिता खुली आँखों से सोता है
विधवा बीवी बेसहारा हो जाती है
बच्चो के भविष्य में अंधकार आ जाता है
तब इन सब के बीच
मसीहा बना नेता कुछ पैसो का चेक
और कुछ लोक लुभावने वादे लेके पहुचता है
गाव के चौराहे पे एक पत्थर कि मूर्ति लगवाता है
और वाहवाही लूट के चला जाता है
और  फिर वही सिलसिला चलता है
फिर कोई मरता है  ॥


तुम

मै कौन हूँ तुम्हारा 
मै दोस्त हूँ 
मै  मित्र हूँ
मै जीवनसाथी हूँ 
मै ओ हूँ जो साथ में सात फेरे लेगा 
जीवनभर साथ निभाएगा 
कभी हसाएगा तो कभी रुलाएगा 
और कभी तुम्हारे आंसू पोछेगा 
मै वो हूँ जिसके लिए तुम व्रत रखती हो 
मै तुम्हारी मांग का सिंदूर हूँ 
मै चन्दन हूँ 
मै चन्दन हूँ ॥ 

मै तुम्हारे माथे कि बिंदी हूँ 
मै तुम्हारे हाथो का चूड़ा हूँ 
मै तुम्हारी साँसे और धड़कन हूँ 
मै ही तुम और तुम ही मै हूँ 
 मै चन्दन हूँ 
मै चन्दन हूँ ॥ 

तुम

कैसे कहूं तुम बिन अब घर सुना लगता है
वो अपनी कोठरी
वो अपना बैठका सुना लगता है
ना दीपावली के दीपक
न होली के रंग
कुछ भी नहीं भाते हैं
बिन तुम्हारे वो चौखटे और दरवाजे काटने को आते हैं
रसोई भी अब बिन तेरे रास नहीं आती है
रोटिया भी फूलने में सकुचाती हैं
न चिड़ियों का चहचहाना पसंद आता है
न मुर्गे कि बाग
हर तरफ जैसे उदासी है
न कोई हर्ष है न कोई उल्लास
आ जाओ साजन मेरे
साथ में रहेंगे
जो भी हो मुश्किल मिल के सहेंगे
एक बार फिर ख़ुशी ही ख़ुशी होगी
मेरी और तेरी जोड़ी क्या खूब जमेंगी
आओ मिलकर दीपक जलाएंगे
एक बार फिर रंग लगाएंगे ॥ 

तुम

समय कि रफ़्तार ने
मन से मासूमियत छीन ली थी
दिल से कठोर
और जीवन को निरीह बना दिया था
तभी सहसा
तुम जीवन में आयी
मेरे बुझते हुए जीवन में आस जगाई
कि मै भी किसी के दिन का चैन और रातों का सुकून हूँ
मै भी किसी कि जिंदगी का जूनून हूँ
मेरे लिए भी कोई रातो को जागता है
मेरी बातो को भी कोई सुनना चाहता है
मुझे भी कोई अपना सब कुछ देना चाहता है
अपना सब कुछ मानना चाहता है
अपनी सांसो में
अपनी रातो में
अपनी आँखों में बसना बसाना चाहता है
बस मुझे औ मुझे चाहता है ॥


तुम !!

सोचता हूँ क्या तुम्हे उपहार दूँ
इस जीवन को ही तुमपे वार दूँ
तुमको तिजोरी बना लूँ अपनी खुशियों कि
अपनी तमन्नाओ कि
और ये जीवन तुमपे वार दूँ ॥

तुम्हारे चेहरे कि मासूमियत
तुम्हारे चेहरे कि लालिमा
तुम्हारी आँखों कि मदहोशी
तुम्हारी प्यारी कोयल सी आवाज को सार बना लूँ
सोचता हूँ क्या तुम्हे उपहार दूँ
इस जीवन को ही तुमपे वार दूँ ॥

वो तुम्हारी प्यारी बाते
वो हर रोज सपनो में कि मुलाकाते
वो तुम्हारा रूठना मनाना
वो तुम्हारा बचपना
इन सबको अपना दिलदार बना लूँ
सोचता हूँ क्या तुम्हे उपहार दूँ
इस जीवन को ही तुमपे वार दूँ ॥

तुम्हारे दिन
तुम्हारी राते
तुम्हारी धड़कने
तुम्हारी साँसे
इन सब पे अपना अधिकार जमा लूँ
सोचता हूँ क्या तुम्हे उपहार दूँ
इस जीवन को ही तुमपे वार दूँ ॥


बूंदाबादी

आज रास्ते  में बूंदाबादी मिली
ऐसा लगा जैसे हर एक बूँद
अपने साथ तुम्हारा संदेसा लायी हो
कुछ कहने आयी हो
कुछ सुनने आयी हो
एक प्यारी सी धुन थी
प्यार था एहसास था
लेकिन न जाने  क्यूँ चुपचाप और उदास थी
उसकी हंसी उसकी खिलखिलाहट गायब थी
मैंने पूछा क्या हुआ ?
क्यूँ इतनी उदास हो ?
मुझे भी बताओ
हाले दिल तो सुनाओ
गहरी साँसे लेती हुए बोली
तुमसे खफा हूँ
तुमसे नाराज हूँ
मैंने पूछा कारन तो बताओ
तो बोली
मुझे न जाने  क्यूँ ऐसा लगता है
कि तुम अब बदल से गए हो
अब तुम वो चन्दन नहीं हो
जो  मुझमे डूब जाते थे
मुझमे समां जाते थे
अब न तो वो प्यार है
न वो बेकरारी है
जो पहले हुआ करती थी
पहले मै  सो जाती थी
तुम जागते थे
देर रात तक बाते किया करते थे
दिन में भी लड़ प्यार दिखाते थे
मुझे मनाते थे
लेकिन अब तुम सो जाते हो
मै  धीरे से मुस्काया
और अपने पास बुला के गले से लगाया
कि सुनो मेरी दिल कि धड़कने
हर धड़कन में तुम्ही हो
बस तुम और तुम  ही हो
ये बाते मन से निकालो
मै  और तुम को छोड़ हम  हो जाओ ॥ 


वो

वो जब लड़ती है तो कहती है
कि तुम कितने  बदल से गए हो
रंग रूप में तो निखरे हो
लेकिन प्यार करना भूल से गए हो
पहले बेख़ौफ़ चलती थी तुम्हारे साथ
अब संभल संभल कर कदम रखती हूँ
कि कहीं  बहक न जाऊँ
कहीं खो ना जाऊँ
कहीं तुम्हारी दुनिया से दूर ना हो जाऊँ
ये मेरा डर है
ये मेरी फिकर है
ये मेरा प्यार है
जो मुझे शंकालु बना देता है
जो मुझे लड़ने पे मजबूर कर देता है
जब मुझे ignore करते हो
तो ऐसा लगता है
जैसे जीवन में अब कुछ बाकी ही नहीं है
हर तरफ निराशा ही निराशा है
तब मै कहता हूँ
कभी खुद को मेरी नजरो से देखो
कितना प्यार करता हूँ
कितने करीब हो
शायद इसका एहसास होगा तुम्हे ॥