चार दिन का जीवन
खामखा की इतनी भागमभाग
न कुछ लेके आये थे
न कुछ लेके जायेंगे
फिर भी मची है हाय हाय
सर्कस के जैसी
तमाशा है जिंदगी
कोई बन्दर है
कोई जोकर है
कोई मदारी है
कोई शिकारी है
कोई दर्शक है
कोई पिंजरे में बंद है
कोई आसमां में गोते खा रहा
तो कोई अपने कद से ही तंग है
चार दिन का जीवन ...........