रविवार, 28 सितंबर 2014

अमेरिका यात्रा

अमेरिका यात्रा से  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक नए माहौल का  सृजन किया है और जातिगत और दलगत राजनीती से ऊपर उठते हुए युवाओं से भरे इस  देश को ये एहसास दिलाया है की हम भी विश्व में एक शक्ति के रूप में उभर सकते हैं ।
पहले थोड़ा पीछे चलते हैं और  याद करते हैं चुनाव से पहले के निराशा भरे माहौल को जब हर नेता मोदी खिलाफ बोल के अपने आप को सेक्युलर दिखा रहा था हद तो तब हुई जब नितीश कुमार ने व्यकितगत जलन की वजह से भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन तोड़ लिया और एक सिलसिलेवार तरीके से दलितों की मसीहा बहन मायावती , जातिगत राजनीति के सरताज मुलायम सिंह , गुंडाराज के प्रतीक ओमप्रकाश चौटाला, जंगलराज के प्रतीक लालू प्रसाद और कांग्रेस के युवराज तथा कोंग्रेसी चापलूसों की माँ सोनिया गांधी सरीखे नेताओं ने मनगढ़ंत और बेमानी आरोपों की झड़ी लगा दी और  इन सब का परिणाम यह हुआ की मनमोहन के १० साल के मौन से त्रस्त भारतीय जनता ने जातिगत आधारो को छोड़ मजबूत इरादो वाले नरेंद्र मोदी को बहुमत दिया ।
अब मोदी अमेरिका में हैं और जैसे अमेरिकी भारतीय इस दिन का बहुत बेसब्री से इंतजार कर रहे थे की कोई ऐसा नेता आये जो सच में लगे की नेता है और उनकी ख़ुशी देखते ही बन रही है । आज होने वाले मोदी रिसेप्शन में 18000 से 20000 लोग बाकायदा टिकट खरीद के उनका स्पीच सुनेगे जोकि राहुल गांधी जी की भारत में की गयी रैलियों की भीड़ से भी ज्यादा है । पूरा अमेरिका मोदीमय हुआ है आज अमेरिकी भारतियों के साथ-२ हर भारतीय चाहे वो भारत में हो या कही बाहर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है ।
ये अमेरिकी दौरा उन भारतीय नेताओं के मुह पे तमाचा है जो 21st centuary में भी धर्म और जाति की राजनीति कर रहे हैं क्यूंकि अब भारतीय जनता विकास चाहती है।