बुधवार, 20 अप्रैल 2011

प्यार,इश्क और मोहब्बत!



प्यार,इश्क और मोहब्बत! आखिर सच क्या है? अक्सर देखा गया है की  १८ साल से लेकर २८ साल की अवस्था तक लोग इन चक्करों  में पड़कर अपनी जिंदगी के कुछ बहुत महत्वपूर्ण समय बर्बाद कर देते हैं,और जब जिंदगी के मध्य दौर में होते हैं या यूँ कहें की जब पूर्ण रूप से जिंदगी को समझते है तब उन्हें लगता है की कितना समय उन्होंने इसके लिए गवा दिया. वैसे आजकल १५ साल से ही शुरू होकर ५० साल तक होने लगा है. क्या ये एक लगाव है,आकर्षण है अपने से विपरीत सेक्स की तरफ या कुछ और, इस तरह के कुछ सवालों ने मुझे झकझोर दिया है या यूँ कहें की मजबूर किया है कुछ लिखने के लिए की आखिर हम अपने आप को  जवानी के शुरूआती दिनों में संभाल क्यूँ नहीं पाते हैं, क्या हमारी संगत गलत लोगों से होती है या परवरिश में हमें इन बातो के बारे में न बताने की वजह होता है या कुछ और ....मैंने ओशो जी की किताब पढ़ी "सम्भोग से समाधी की ओर" और  उस किताब को पढ़ के लगा की सच में कही न कहीं हम जब छोटे होते हैं तो इन सब के बारे में बताया ही नहीं जाता ओर फिर हम जहाँ से भी इन सब के बारे में जो गलत सही पता लगा पाते हैं वो लगाते हैं और जब हमें बाते पता चलती हैं तो फिर हम अपने से विपरीत सेक्स की तरफ आकर्षित होने लगते हैं और फिर  हम बिना सोचे समझे किसी  लड़की  से दिल लगा बैठते हैं और हम उसे प्यार मान बैठते हैं....कई लोगो को शादी-ब्याह में प्यार हो जाता है,कुछ लोगो को स्कूल में हो जाता है और यहाँ तक की कुछ लोगों को अपने ही  गाँव की लड़की से प्यार हो जाता है....और मजे की बात है की उस प्यार से अलग होने के बाद हमें फिर दुबारा प्यार हो जाता है......

मै अगर अपनी बात करूँ तो मैंने पाया है की ये चीजे केवल आदमी को ख़राब करती हैं या यूँ कहें की समय बर्बाद करती हैं,आपने जो लक्ष्य निर्धारित किया है उससे आप कही न कही दूर होने लगते हैं , क्योंकि अक्सर देखा गया है की जब लोग अलग होते हैं एक दूसरे से तो फिर कुछ लोग संभाल नहीं पाते अपने आप को और फिर नशा,दारु,और सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं,और ऐसे लोग  थोड़े कमजोर होते हैं वरना वो आत्महत्या कर ले,हालाँकि बहुत सारे लोग कर भी लेते है आप समाचार पत्रों में हमेशा पढ़ सकते हैं और जो लोग नहीं कर पाते हैं   वो लोग आसान रास्ता अपनाते हैं मरने के लिए और वही लोग सिगरेट, बीडी, गुटका खाना शुरू कर देते हैं.....अपने लक्ष्य की तरफ से भटक जाते हैं और अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण समय का सदुपयोग नहीं कर पाते हैं. और जिन लोगो का प्यार अभी जरी होता है उनमे से ८० % लोग एक दुसरे पे शक कर रहे होते हैं ,केवल १० से २० % लोग इसमे सफल हो पाते हैं.

कितनी बड़ी विडम्बना है हमारे जीवन की हम उसके लिए दुःख मनाते है,रोते हैं,नशा करना शुरू कर देते हैं,कई लोग तो जीवन से ही बिमुख होने की कोशिश करते हैं,  जो २ साल या ५ साल से हमारे जीवन में आया था और चला गया लेकिन उसके बारे में नहीं सोचते जिन्होंने हमें जन्म दिया,जिन्होंने कितना दुःख सहा हमारे लिए,खुद परेशान हुए लेकिन हमारे लिए अपने अस्तर से बेहतर सुविधाएँ प्रदान की हमें...और हमें इस काबिल बनाया की हम प्यार और मोहब्बत कर सकें...आखिर हम अपनी जिम्मेदारियों से कैसे विमुख हो सकते हैं? आज की यवा  पीढ़ी में ७० % लोग ऐसा ही कर रहे हैं माँ बाप को भूलकर या तो अपने प्रियतम के साथ मौज मना रहे हैं या उसके गम में आंसू बहा रहे हैं या फिर किसी नयी प्रियतमा की खोज में समय ख़राब कर रहे हैं.

अब अगर मै ये सब बाते लिख रहा हूँ तो इसका मतलब ये नहीं है की मै ये सारी बाते मान रहा हूँ लेकिन इतना जरूर है की मै अब समझ गया हूँ की आखिर इनका सच क्या है और इसके लिए मै भगवान जी  का आभारी रहूँगा की उन्होंने मेरे कुछ महत्वपूर्ण साल बचा लिए और मुझे इतनी सद्बुद्धि दी की मै सच और झूठ को पहचान सकूँ.
हालाँकि प्यार- मोहब्बत इतना भी ख़राब नहीं है इसी की वजह से  बहुत से लोग बहुत अच्छा कर जाते हैं जैसे उदहारण के तौर पे आप शाहरुख़ खान और गौरी को देख सकते हैं अक्षय और ट्विंकल को देख सकते है या हमारे  समाज में बहुत से ऐसे लोग मिल जायेंगे जो की सफल हैं.  मुझे ये भी पता है की हर सिक्के के दो पहलु होते हैं लेकिन इस सिक्के का एक पहलु बहुत खतरनाक है और वही पहलु कितने लोगो का भविष्य बर्बाद कर रहा है....इस लिए मेरी आप लोगो से गुजारिश है की इसके अस्तर को समझे और जब तक पूर्ण रूप से समझदार न हो जाये या यूँ कहें की कुछ बन न जाये तब तक इस बीमारी से दूर रहें और अगर मजबूर हैं की दूर नहीं रह सकते हैं तो संभल के रहिये....क्योंकि ये भी H1N1 की तरह ही खतरनाक है.....
मुझे पता है की इस  लेख में बहुत सारी गलतियाँ हैं जिनमे सुधार की जरूरत है,और इसके लिए आपके सुझाओं का मै आभारी रहूँगा !भगवान मुझे सद्बुद्धि दे सही मार्ग पे चलने की......

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