शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

आखिर क्यूँ?


आखिर क्यूँ
बेगुनाह 
मासूम 
और आम आदमी हर बार मारे जाते हैं  ?
आखिर क्या फायदा  ?
इससे क्या मिलता है ?
हिन्दू मरे या मुस्लिम 
भारत में मरे या पाकिस्तान में 
आखिर मरती तो इंसानियत ही है 
इस छोटी सी बात को ये सरफिरे लोग क्यूँ नहीं समझ पाते है 
हर एक दो महीने बाद क्यूँ  कभी मुंबई में तो कभी देल्ही में बम धमाके कराते हैं |

कभी हिजबुल मुझाहिदीन तो कभी अलकायदा 
बस नाम बदल जाते हैं 
निष्कर्ष वही रहता है |
क्या इनमे मानवता नहीं है ?
क्या इनमे इंसानियत नहीं है?
ये मानव  ही हैं 
या उस रूप में दानव 
आखिर क्यों,कब तक ये मासूम मारे जायेंगे
क्या हम उन्हें बचा पाएंगे ?.......................

जिस जीवन के लिए लोग इतने कष्ट और दुःख उठाते हैं
उसे ये पापी पल भर में छीन ले जाते हैं
किसी माँ का बेटा गया                      
तो किसी की सूनी हुई कलाई 
किसी का सुहाग उजड़ा 
तो किसी का गया भाई 
आखिर ये निर्दोष कब तक मारे जायेंगे ?
क्या हम उन्हें बचा पाएंगे?................................................

सरकार हमारी चास्मदिद बन के सब कुछ देखती है
दो चार दिन बाद सब बाते भूल 
फिर अपने पुराने रंग में जाती है 
आखिर इसमें दोष किसका है ?
आओ हम सब मिलकर उन आत्माओं के लिए शांति की गुहार करे 
भगवान से ये आरजूं करे की फिर ऐसा दिन आये 
कोई बम धमाका हो कोई मारा जाये ....................................................

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