जीवन हर पल- हर छड रूप बदलता है
कभी आदमी आसमान पे तो कभी जमीं पे होता है |
हर एक दिन आदमी नए विचारों नए अरमानो के साथ उठता है
थका- हारा सा शाम को फिर घर लौटता है
अगले दिन फिर नयी संभावनाओं के साथ उठता है
अपनी चाहत को पाने की आस में इधर-उधर फिरता है
लेकिन न जाने क्यूँ वो सब पा जाने के बाद भी आदमी अन्दर से शांत नहीं हो पाता है
जिसके लिए ये सब किया था उसे पाके भी घबराता है |
जीवन हर पल- हर छड रूप बदलता है .........................................
कभी वही विचार आदमी को हवा में उड़ाते हैं
तो कभी वही विचार आदमी को जमीं पे गिराते हैं
मुश्किल से मुश्किल चीज को आसान दिखाते हैं
तो कभी आसान चीज को असभव सा प्रतीत कराते हैं |
हमारे विचार ही हमारे भविष्य को निर्धारित करते हैं
हम क्या बनेगे इस बात को प्रतिपादित करते हैं
न जाने फिर क्यूँ हम अपने विचारों में शुद्धता नहीं ला पाते हैं
हर घडी शिकायत या बुराई करते नजर आते हैं |
जीवन हर पल-हर छड रूप बदलता है ...............................................
कभी आदमी किसी के प्यार में अपनों को भी भुला देता है
तो कभी अपनों के पास जाने के लिए उसी प्यार को मिटा देता है
कभी किसी के कहने पे हम अपने को सुरूप मान लेते हैं
तो कभी उसी के कहने पे खुद को कुरूप नजर आते हैं
प्रेमी-प्रेमिका शुरू के दिनों में एक दुसरे पे जान लुटाते हैं
थोड़े दिन बाद मन भर गया तो एक-दुसरे की जान निकालते हैं
जैसा सोचो वैसा है जीवन
सोचो तो सम्भावनाये हैं
सोचो तो विपदाए हैं
जो सोचो वही मिलता है
जो बोवोगे वही उगता है
जीवन हर पल-हर छड रूप बदलता है .................................................................

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