गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

सफलता कि कहानी मेरी जुबानी !!

हर संत कहे साधू कहे सच और साहस है जिसके मन में अंत में जीत उसी की रहे........लगान फ़िल्म के गाने के ये बोल आज कितने सही साबित हुए हैं ,आख़िरकार श्री अन्ना हजारे और उनके साथ आमरण अनशन पर बैठे हुए २५० लोगों की जीत हुई और केंद्र सरकार को झुकना पड़ा.मुझे लगता है अब नेताओं की नीद में खलन पड़ गयी है अब उन्हें भी पाता चल गया है की भारत में एक दूसरे  गाँधी का जनम हो गया है और आज का ये गाँधी इन चोर,भ्रष्ट,बेईमान,दुष्ट और पथ्भ्रस्त नेताओं को बक्सने वाला नहीं है.अच्छा इस आमरण अनशन से आज के युवाओं को एक बात तो समझ में आ गयी होगी की अहिंसा ही सबसे बड़ा हथियार है क्योंकि  किसी अहिंसावादी को मारने में सरकार भी दस बार सोचेगी और अगर आप हिंसा से कोई आन्दोलन चलाते हैं तो उसे कुचलने में सरकार ज्यादा समय नहीं लगाती है इस सब से एक सन्देश तो जाता है की बापू ने जो कदम पहले उठाया था वो आज भी कारगर है और आगे भी रहेगा.


मैंने अपने पुरे जीवन में अभी तक कोई ऐसा आन्दोलन नहीं देखा था,लाखों की संख्या में लोग जंतर मंतर पर नारा लगा रहे थे-अन्ना तुम संघर्ष करो हम तुमाहरे साथ हैं.......भारत की मजबूरी है लोकपाल जरूरी है.........गली-२ में शोर है सारे नेता चोर हैं.....गाँधी हम शर्मिंदा हैं क्योंकि भ्रस्टाचारी जिन्दा हैं.....इन्ही तरह के कुछ नारों से पूरा आसमान गूँज रहा था,क्या बड़ा क्या छोटा,क्या हिन्दू क्या मुस्लिम,क्या गरीब क्या अमीर सब मिल के भ्रस्टाचार के खिलाफ नारा लगा रहे थे .पहली बार मैंने इतनी बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ भ्रस्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हुए देखा वो भी बिना किसी पार्टी के,ये सुगबुगाहट है भारत के बदलाव की और लोगों की नाराजगी की आम जनता इन भ्रष्ट नेताओं से कितनी परेशान हो चुकी है,कही न कहीं अब जनता बदलाव चाहती है ,अब जनता को समझ में आ चूका है की ९९% नेता बेईमान हैं,चोर हैं,भ्रष्ट हैं और इन्हें सबक सिखाने की जरूरत है. एक छोटे से उदहारण से इस बात को समझाने की कोशिस करूंगा:कुमारी मायावती जी के पास आज एक अरब से भी ज्यादा की चल-अचल सम्पदा है और ये वो सम्पदा है जो उन्होंने लोगों को बताया है और जो नहीं बताया है वो भगवान जाने अब कोई उनसे पूछे की एक दलित की बेटी जो की एक साधारण स्कूल में आध्यापक थी आखिर पिचले १० सालों में उसके पास कहाँ से इतना पैसा आ गया ,आखिर उनके पास कौन सा ऐसा कारखाना है जो वो इतने अकूत सम्पदा की मालकिन बन बैठी हैं. आज उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा दलितों की हालत ख़राब हैं क्योंकि सारे उच्च जाति के लोग बहूजन समाज पार्टी में आ गए हैं  और दलित बेचारे फिर से दलित हो गए हैं .जो सपना लेके श्री कांशीराम जी ने इस पार्टी की शुरुआत की थी पार्टी सत्ता में आने के बाद अपने उन विचारों ,उन उदेश्यों को भूल चुकी है और यहाँ तक की पार्टी का नारा .....चढ़ गुंडों की छातीपर बटन दबाव हाथी पर  अब बिलकुल बदल गया है क्योंकि अब दलित लोग उनसे पूछ रहे हैं की जब गुंडे चढ़ गए हाथी पर तो बटन कहाँ दबाऊ....कमल पर या साइकल पर या फिर अपनी पुराणी पार्टी निशान पंजे पर....
मै ए सब क्यों कह रहा हूँ क्योंकि मायावती जी ने अपने सिधान्तों और जिस वजह से पार्टी सत्ता में आई उसको भूल चुकी हैं और आने वालों दिनों में जनता उनको जवाब देगी और भगवान करें ऐसा हो.

मै सुबह करीब ११ बज के ३० मिनट पे वहां पहुंचा आँखों के सामने ऐसा नजारा जो आँखे देखने के लियी तरस रही थी,कहीं न कहीं मेरे मन में ये बहुत दिन से चल रहा था या यूँ कहें की हर भारतीय ये चाहता था की लोग ऐसे अनशन में बिना बुलाये अपने मन से शामिल हो.जब मै पहुंचा तो मेधा पाटेकर जी बोल रही थी सब लोग ध्यान से उनको सुन रहे थे,बीच-२ में तालियों की आवाज भी गूँज रही थी उसी दौरान किरण बेदी जी को देखने का सौभाग्य मिला साथ में अरविन्द केजरीवाल,फराह खान,विशाल,ई श्रीधरन,एक बाबा १०३ साल की अवस्था में इस अनशन को अपना समर्थन देने आये थे और वो स्वतन्त्रा सेनानी भी थे,अनुपम खेर,स्वामी अग्निवेश जी और बहुत सारे लोग,लेकिन तहलका तब मचा जब बाबा रामदेव जी पहुंचे ,लोग आपे से बाहर हो गए जोर-२ से नारे लगने लगे बाबा रामदेव की जय -बाबा रामदेव की जय,सारा वातावरण कोलाहल से भर गया और अंत में किरण बेदी जी को आ के सबको शांत कराना पड़ा .उसके थोड़ी देर बाद बाबा बोलने के लिए आये क्या निराला अंदाज,मुस्कुराता  चेहरा,चेहरे पे लालिमा बाबा बिलकुल अद्भुत लग रहे थे और  जनता मंत्रमुग्ध होके बाबा को सुने जा रही थी....बाबा ने पूरी फिजा ही  बदल दी इस आमरण अनशन की जो आमरण अनशनकारी लेते हुए थे वो उठ के बैठ गए और जो सो रहे थे वो जग गए ...क्या अद्भुत दृश्य था वो मै शब्दों में बयां नहीं कर सकता...मेरे शब्द कम पड़ेगे उनके लिए.

कब शाम हो गयी हमें पता ही नहीं चला और उसके बाद लोग हाथों में प्लेट और च्च्मच ले के बजाते हुए इंडिया गाते की तरफ चलने लगे.लाखों लोग हाथों में प्लेट बजाते और नारा लगाते चले जा रहे थे,असीम उत्साह कुछ नया करने का इरादा ,मन में विश्वास और तभी लग रहा था की सरकार अब ज्यादा देर नहीं करने वाली.
हम एक घंटे में इंडिया गेट पहुंचे और फिर वहां से मार्च में शामिल होके फिर वापस  आये जंतर-मंतर. अंत में इतना कहना चाहूँगा की भगवान करें भारत फिर पहले जैसा पाविट्र और शुद्ध हो जाये और साथ के साथ हम लोगों के मन में भी सच्चाई और सद्भावना का वास हो..........आज के लिए इतना ही बाकि फिर कल.

3 टिप्‍पणियां:

  1. MR CHANDAN! MAI APSE BAS EK HI SAWAAL KARNA CHAHOONGA- HAM HI KYUN ISTEMAAL KYE JAATE HAIN?

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  2. शायद आप का नाम होता तो मुझे आसानी होती लेकिन फिर भी दोस्त बस इतना कहना चाहूँगा की क्योंकि हम लोग अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति बिलकुल उत्तरदायी नहीं है.....यही एक कारण है |.

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