चलो आज फिर मिलकर एक नया संकल्प लेते हैं
नए इरादों नए विचारों के साथ
की हर आदमी की इज्जत करेंगे
बिना ये देखे की वो गरीब है या अमीर
मालिक है या नौकर
प्रजा है या शासक
क्यूंकि
पद पे बैठे लोगों की इज्जत करना तू आपकी मज़बूरी है
नीचे वालों से कैसे मिलते हो इसमें आपकी समझदारी है |
लोग पैसों की वजह से रिश्तों में भी मतभेद करते हैं
जिस बहन के पास पैसा है उसके साथ भैया दूज भी मनाएंगे
और जिस बहन के पास नहीं है उससे मिलने रक्षाबंधन में भी नहीं जायेंगे
अपने से छोटों को डरायेंगे
और जब अपना बॉस आ जाये तो जीभ हिलाते नजर आयेंगे |
ऐसी दोहरी जिंदगी जीते-२ क्या शर्म नहीं आती है
आखिर कब तक ऐसा चलेगा
कभी न कभी तो तुम्हरा भी सर झुकेगा
और कभी न कभी तुम्हारा भी जमीर जगेगा
चलो आज फिर मिलकर एक संकल्प लेते हैं............................................
कभी-२ मै सोचता हूँ की आखिर ऐसा क्यूँ होता है
की लोग इस छोटी सी बात को समझ नहीं पाते है
की भगवान की इस दुनिया से
सबको एक दिन जाना है
कर लो जितनी भी चोरी
सब यहीं रह जाना है
फिर क्यूँ हम जीवन भर बैर और इर्ष्या के साथ जीते हैं
जाति,धर्म,सम्प्रदाय और रंग- भेद के नाम पे खून बहाते हैं
चलो आज फिर मिलकर एक संकल्प लेते हैं........................................
सोचिये जरा अगर ऐसा हो जाये तो क्या होगा
मनुष्य हर मनुष्य की इज्जत करेगा
बिना ये देखे की वो क्या है
अपने और गैरों में फर्क नहीं करेगा
हर धर्म और जाति को सम्मान देगा
दीन दुखियारों का कष्ट हरेगा
हर तरफ ख़ुशी और सदभाव होगा |
चलो आज फिर मिलकर एक संकल्प लेते हैं........................

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