गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

लाचारी!!

वो दर्द के मायने क्या समझेंगे
जिन्होंने दर्द को जाना ही नहीं है 
गरीबी ,भुखमरी और लाचारी को क्या समझेंगे
जिन्होंने कभी जमीं पे कदम उतारा ही नहीं है  ॥


जिनके लिए जनता केवल वोट है 
जिन्हे सत्ता का लोभ है 
जो लालची और  बेईमान है 
वो  प्यार और लगाव क्या समझेंगे 
जिन्होंने कभी इन सबको जाना ही नहीं है ॥



जिनके लिए मौत बाये हाथ का खेल है 
मारना किसी को चुटकियों का खेल है 
वो उस मरने वाले कि माँ कि विडम्बना को क्या समझेंगे 
जिन्होंने कभी माँ कि ममता को जाना ही नहीं है ॥


जिनको सत्ता का दम्भ है 
जिनके लिए अफजल की फांसी चुनावी स्टंट है
वो उन वीरो कि कुर्बानी को क्या समझेंगे
जिन्होंने कभी  देशभक्ति को जाना ही  नहीं है ॥ 






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