राहे जिंदगी जब गुजरा
तो हर इसां अपना सा नजर आया
मुस्किले जब आयी
राहे जिंदगी में
तो हर इंसा बदला-बदला सा नजर आया ॥
भ्रम में जीते थे
कि ये अपने है
वो पराये हैं
चलो अच्छा हुआ उन्होंने ये भ्रम भी तोड़ दिया ॥
जिन्हे हम फक्र से अपना कहते थे
जिनके लिए जीते थे मरते थे
मुश्किल घडी में
उन्होंने भी किनारा कर लिया
बेटा -बेटा कहके न जाने कब
अपनों से पराया कर दिया ॥
बेटा -बेटा कहते थे
साथ उठते थे
साथ बैठते थे
पर न जाने किसका असर हुआ
जब जरुरत थी अपनों के मरहम की
तभी उन्होंने जख्म दिया ॥
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