शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

प्रार्थना


आज फिर सपनो को पंख लगे हैं 
इस चाहत में की मै फिर उड़ पाउँगा
जो मंजिल मैंने चाही है उसे छू पाउँगा
दिल की चाहत हर धड़कन के साथ जवां होती जाती है 
सपने,हकीकत हो जायेंगे इस उम्मीद को पंख लगाती है 
की मै भी एक दिन सफल कहा जाऊंगा
अपने और गैरो में पहचाना जाऊंगा |
बस यही आरजू है भगवन पूरी कर दो आस
जिस लायक हैं हम वो मिल जाये बस यही हमारा प्रयास |

इस भागदौड़ भरी जिंदगी में 
क्या मै अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर पाउँगा ?
जो मैंने सोचा है क्या उसे निभा पाउँगा ?
अक्सर ऐसे सवाल मेरे मन में व्यथा उत्पन्न कर जाते हैं 
चाहते हुए भी मेरे सुने मन में अलख जागते हैं
की जागो,क्यूँ सोये हो,
क्यूँ तुम अपनी आँखे मूद के खोये हो 
क्या इसीलिए तुम्हे ये जीवन मिला है
आखिर कब तक निरुय्देश्य जीते जाओगे 
अब तो जाग जाओ वरना समय निकल गया तो वापस नहीं पाओगे |
बस यही आरजू है भगवन पूरी कर दो आस 
जिस लायक हैं हम वो मिल जाये बस यही हमारा प्रयास |


बस यही प्रार्थना है प्रभु आप से 
मन के विचार को शुद्ध कर दो 
तन चाहे तो काला कर दो 
लेकिन मन को गोरा कर दो 
तन काला होगा तो लोग हँसेंगे 
लेकिन मन काला होगा तो खुद रोयेंगे |
बस यही आरजू है भगवन पूरी कर दो आस 
जिस लायक हैं हम वो मिल जाये बस यही हमारा प्रयास |

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