शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

ओशो जी


ओशो को पढ़ के,ओशो को सुन के 
ओशो के रंग में घुल के 
हम जीवन जीने की सार्थकता का पता लगा सकते हैं 
क्यूँ मिला है ?
किसलिए  मिला है
इसका पता लगा सकते हैं ......................

ओशो कहते थे खुल के जीवन को जियो
हर- पल हर-छड़ खुशियों को अपने अंदर पियो |
सम्प्पति, धन और दौलत की तुम क्यों चिंता करते हो  
विप्पति लाती है ये सब जिसके लिए तुम रोज- मरते हो |
कितने जन्म ले चुके हो अब तक 
क्या मन नहीं भरा तुम्हारा ?
कब तक ऐसे ही अपने जीवन को व्वर्थ लुटावोगे
सभाल जाओ वरना समय निकल गया तो लौट नहीं पाओगे .........................

बचपन में वो अपनी नानी के सानिध्य  में रहते थे
पगलाबाबा,मस्त्बाबा और माग्गाबबा उनपे जान लुटाते थे |
स्कूल के अध्यापक उनसे अपनी जान बचाते थे 
ओशो पहुंचे स्कूल इसके लिए वो भगवान से प्रार्थना करते देखे जाते थे |
वो ज्ञानी थे वो विज्ञानी थे
वो देखने में साधारण लेकिन स्वाभिमानी थे 
उनमे साहस,करुणा और प्यार भरा था 
वो दया मूर्ति थे उनमे जीवन के प्रति विश्वास भरा था....


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