उस नन्ही सी प्यारी सी छोटी सी
बिट्टो की आवाज सुनके
दिल का रोम-२ भर उठता है
कभी तो दिल हँसता है
तो कभी उसे याद करके रोता है
उस नन्ही सी प्यारी सी बिट्टो की आवाज सुनके ......
जब वह अपनी तुतलाती जुबान में
मामा- मामा कहती है
और पूछती है
कि मामा कब आवोगे?
मेरे लिए क्या लावोगे ?
कहाँ-२ घुमाओगे ?
क्या-२ दिखाओगे ?
क्या खिलाओगे ?
हसावोगे या रुलाओगे?
तब जी करता है
इस दुनिया की सारी खुशियाँ उसे दे दूँ
चाँद तारे सितारे सब उसे दे दूँ
और उसके पास पास बैठ के
उसकी तुतलाती जुबान से
बाते करता रहूँ
सुनता रहूँ
और अपलक उसे देखता रहूँ
निहारता रहूँ
उस नन्ही सी प्यारी सी बिट्टो की आवाज सुनके....................
फ़ोन पे बिट्टो की प्यारी सी आवाज
दिल को छू जाती है
अपनेपन का एहसास कराती है
कितना लगाव और अपनापन दर्शाती है
अब जाके मालूम चलता है
की बच्चों से लगाव क्या होता है
क्यों हर कोई बच्चों पे सब कुछ न्योछावर करता है
और सब कुछ लुटा के भी
ख़ुशी का अनुभव करता है
उस नन्ही सी प्यारी सी बिट्टो की आवाज सुनके ...................

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