अगला पल क्या होगा
मालूम नहीं
मालूम नहीं
हम तुम होंगे
ये जीवन होगा
नभ
सृष्टि
ये दुनिया
ये तारे चाँद सितारे होंगे
मालूम नहीं
देश होंगे
प्रदेश होंगे
सीमायें होंगी
युद्ध होंगे
मालूम नहीं ॥
जब ये सब होगा ही नहीं
तो क्यूँ मन में इतनी अभिलाषा है
क्यूँ सब कुछ अपना बनाने कि आशा है
क्यूँ आदमी इतना परेशान है?
क्यूँ आज इंसान इंसान नहीं है ?
क्यूँ आदमियों में राम नहीं हैं
नारियों में सीता नहीं है
क्यूँ हर तरफ कोहराम ही कोहराम है
ये सोचने कि बात है
ये सोचने कि बात है
अगला पल क्या होगा मालूम नहीं ॥
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