मन उदास
व्यथा से भरा हुआ
न कुछ सोच पा रहा
न कुछ समझ में आ रहा
बस न जाने किस राह पे अग्रसर
बस यूँ ही
बढ़ा जा रहा
न जाने क्या पाना चाहता है
न जाने क्या ढूँढता है
न जाने क्यूँ ?
भ्रमित
भयभीत
सहमा सा
डरा हुआ आगे बढ़ रहा है
चाहता हूँ
बेख़ौफ़ रहे
किसी से ना डरे
सही राह पे चले
लेकिन न जाने क्यूँ
जो चाहता हूँ
वो नहीं हो रहा है
मन उदास
व्यथा से भरा हुआ
न कुछ सोच पा रहा
न कुछ समझ में आ रहा ॥
व्यथा से भरा हुआ
न कुछ सोच पा रहा
न कुछ समझ में आ रहा
बस न जाने किस राह पे अग्रसर
बस यूँ ही
बढ़ा जा रहा
न जाने क्या पाना चाहता है
न जाने क्या ढूँढता है
न जाने क्यूँ ?
भ्रमित
भयभीत
सहमा सा
डरा हुआ आगे बढ़ रहा है
चाहता हूँ
बेख़ौफ़ रहे
किसी से ना डरे
सही राह पे चले
लेकिन न जाने क्यूँ
जो चाहता हूँ
वो नहीं हो रहा है
मन उदास
व्यथा से भरा हुआ
न कुछ सोच पा रहा
न कुछ समझ में आ रहा ॥
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