शनिवार, 1 मार्च 2014

सैनिक

वो रोज हमारे वतन  पे गोलाबारी करते हैं
हमारे जवानो के लहू से खेलते हैं
उनकी गुस्ताखियां इस कदर बढ़ चुकी हैं
कि हमारे सैनिको के सर काट ले जाते है
और हमारी बुझदिल सरकार
हाथ पे हाथ धरे बैठी है
सोनिया राहुल कि चापलूसी में लगी है
न जाने कब इन हुक्मरानो को अक्ल आएगी
न जाने कब ये धरती अपने सपूतो के खून से नहीं नहायेगी
न जाने कब अमन और चैन होगा
न जाने कब एक और सरबजीत नहीं मरेगा ॥

दुःख होता है जब कोई शहीद तिरंगे में लिपटा होता है
माँ रोती है
पिता खुली आँखों से सोता है
विधवा बीवी बेसहारा हो जाती है
बच्चो के भविष्य में अंधकार आ जाता है
तब इन सब के बीच
मसीहा बना नेता कुछ पैसो का चेक
और कुछ लोक लुभावने वादे लेके पहुचता है
गाव के चौराहे पे एक पत्थर कि मूर्ति लगवाता है
और वाहवाही लूट के चला जाता है
और  फिर वही सिलसिला चलता है
फिर कोई मरता है  ॥


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