जीवन और मरण के बीच फसा हुआ है मानव
मरना है सबको एक दिन फिर भी न जाने क्यों बना हुआ है दानव |
कई लोग मोक्ष दिलाने की दुकाने चला रहे हैं
सीधी-साधी जनता को पागल बना रहे हैं
न जाने कितने बाबा इसी नाम पे अपना गोरख धंधा चला रहे हैं
खुद को कुछ मालूम नहीं है लेकिन जनता को बतला रहे हैं
कोई आसाराम बापू तो कोई नित्यानंद के नाम से जाना जाता है
तो कोई खुद को भगवान बता पूजा करवाता है
जब ऐसे ही भगवान है तो भक्तो का क्या होगा ?
मोक्ष की बात तो दूर जीवन में भी नहीं कोई परिवर्तन होगा |
साईं बाबा पे भक्तो की बड़ी अमिट आस्था थी
इसे देख के कुछ लोग खुद को सत्य साईं बताते है
लोगो को लोभ ,तृष्णा और धन के लालच से बचने को बताते हैं
लेकिन खुद के कमरे में करोडो का मॉल रख के सोते हैं
अजब-२ ढंग के हैं ये बाबा और धन्य है उनके पुजारी
देखने में तो हैं ये सीधे-साधे लेकिन अन्दर से हैं ये व्यभिचारी |
जीवन और मरण के बीच फसा हुआ है मानव
मरना है सबको एक दिन फिर भी न जाने क्यों बना हुआ है दानव ...............................................................
कोई पहनता लाल चोला तो कोई नारंगी
सबके हैं अपने तरीके लेकिन सब के सब हैं ढोंगी
कोई कहता कृष्ण को पूजो
कोई कहता राम को
कोई है निरंकारी
तो कोई घनश्याम को
जनता बेचारी परेशान है किस-२ को पूजें
इतने देवता पहले से ही थे
अब इन बाबा लोगो का क्या करें ?
जीवन और मरण के बीच फसा हुआ है मानव
मरना है सबको एक दिन फिर भी न जाने क्यों बना हुआ है दानव ......................................

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें