शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

धड़कन


दिल की हर एक धड़कन गीत तुमाहरे गाती हैं
मै जागूं या सोउँ हर पल याद तुम्हारी आती हैं |   

जब भी तुम उदास होती हो मेरा मन  बेचैन हो जाता है
फिर जब तुम मुस्काती हो तब मेरे दिल को चैन आता है |

तुम मिलोगी तो जीने का सबब ही कुछ और होगा 
बिना तुमाहरे तो अब जीना भी निरूदेश्य होगा |

अक्सर ऐसी बाते दिल टूटे या फिर आशिक मिजाज करते हैं
आज इसके लिए कल उसके लिए इन्ही लफ्जो का इस्तेमाल करते हैं
बस नाम बदल लेते हैं शब्द यही रहते हैं 
ये फस जाये तो तो ठीक सही नहीं तो कहीं और चांस लेते हैं 
बच के रहना ऐसे लोगो से ये अक्सर हर जगह पाए जाते हैं
मुखौटा लगाये रहते हैं इसलिए पहचान में नहीं आते हैं |

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