शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

आगरा !


[2.00 Pm]
सब है लालायित आगरा जाने को  
वहां पहुँच के ताजमहल पे फोटो खिचवाने को 
आगरा के किले पे चढ़ के चिल्लाने को 
और वहां के पेठे खाने को |...
प्रभु की कृपा से आज वो शुभ दिन आया है 
टूर पे जाने के लिए सबने विचार बनाया है |
ज्ञान,अरविन्द और सोनू ने की पूरी तैयारी है 
और इनके गुरु पंकज ने ली पूरी जिम्मेदारी है |
[3.30Pm]
दीपक,मोनू और डब्लू किसी कारण से नहीं पाए हैं
सोनिया,श्रुति और पूजा को देखो इन्हें इनके घर वाले भी नहीं रोक पाए हैं |
मनोरमा ने कल ही फ़ोन कर के मन कर दिया था और कह दिया था की सर हम नहीं जा पाएंगे 
क्योंकि हमारे बाबूजी  इस बात को नहीं पचा पाएंगे 
अब भला उनके बाबूजी को कौन बताये की बच्चे घूमेंगे नहीं तो आखिर क्या खाक सीख पाएंगे 
घर में बैठे- आप की तरह कूप मंदुप हो जायेंगे |

[6.00Pm]
ज्ञान ने कहा अरविन्द से,   जाने क्यूँ बस वाला देरी कर रहा है   
बजे कहके बजे रहा है 
अरविन्द ने कहा ज्ञान से, अब इसमें उसकी भी क्या गलती है 
लेट तो होना ही था जब रोड पे इतनी लालबत्ती है
आख़िरकार बस ही गयी 
इंतजार की घड़ियाँ ख़तम हो गयी |
सोनू लड़ते मोनू  से की मै ही बैठूँगा खिड़की वाली साइड में
नहीं मानोगे तो दूंगा एक दो अभी दाहिने हाथ की साइड में 
लड़ते झगड़ते देख के पंकज गए
बिना पूछे समझे दो चार लगा गए 
अब दोनों लड़ रहे हैं की कौन बैठेगा अन्दर वाली साइड में
जब खा लिया एक दो तो क्यूँ बैठना खिड़की वाली साइड में |

[6.45pm]
गोविन्द कह रहे हैं पंकज से सर संख्या बढ़ रही है 
वो देखिये ज्योति और पूजा भी रही है |
अब तो अन्दर जगह ही नहीं बची इन्हें कहाँ बैठाएंगे 
रहने दीजिये इन्हें यही पहले बताने की सजा ये लोग पाएंगे

.............................................. क्रमश:

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