काशी ढूढ़ा
मथुरा ढूढ़ा
ढूढ़ा वृंदावन
नहीं मिले प्रभु आप
भटका मै वन -वन ॥
पूरी ढूढ़ा
प्रयाग ढूंढा
ढूढ़ा कोकिलावन
नहीं मिले प्रभु आप
भटका मै पूरा जीवन ॥
घर-घर ढूढ़ा
मगहर ढूढ़ा
ढूढ़ा पूरा जीवन
नहीं मिले प्रभु आप
भटका मै आजीवन ॥
तब जाके मैंने इस राज को जाना
प्रभु बसते हैं ह्रदय में
गरीबो में
भूखो में
प्यासो में
गरीबो में
भूखो में
प्यासो में
क्यूँ काशी
क्यूँ मथुरा
और क्यूँ वृन्दावन जाना ॥
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें