सोमवार, 3 मार्च 2014

खोज

काशी ढूढ़ा
मथुरा ढूढ़ा
ढूढ़ा वृंदावन 
नहीं मिले प्रभु आप 
भटका मै वन -वन  ॥ 

पूरी ढूढ़ा
प्रयाग ढूंढा 
ढूढ़ा कोकिलावन 
नहीं मिले प्रभु आप 
भटका मै पूरा जीवन    ॥ 

घर-घर ढूढ़ा
मगहर ढूढ़ा 
ढूढ़ा पूरा जीवन 
नहीं मिले प्रभु आप 
भटका मै आजीवन  ॥ 

तब जाके मैंने इस राज को जाना 
प्रभु बसते हैं ह्रदय में
गरीबो में
भूखो में
प्यासो में  
क्यूँ काशी 
क्यूँ मथुरा 
और क्यूँ वृन्दावन जाना ॥  


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