सोमवार, 3 मार्च 2014

तुम

तुम्हारे मुख से पतिदेव सुनना
बिलकुल ऐसा लगता है
जैसे हिरन को कस्तूरी मिल गयी हो
लैला को मझनु
हीर को राँझा
रोमिओ को जूलिएट
कृष्णा को राधा
प्यासे को पानी
बूढ़े को जवानी
निर्धन को धन
मरते हुए को जीवन
असफल आदमी को सफलता
दुर्बल को सजगता
हारे  को जीत
कुरूप को प्रीत
भक्त को भगवान 
बेघर को मकान
दिलवाले को दुल्हनिया
प्रेमी को सजनिया
ऐसा है एहसास
तुम्हारे मुख से पतिदेव सुनने का ॥ 

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